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अर्जुन अवार्डी कोच कृपाशंकर बिश्नोई की कलम से सभी समाज के लोगो को जाटो का अनुसरण करना चाहिए |

बिश्नोई समाज को नहीं है खेलों में रूचि, नेतागिरी तो होती रहेगी, पहले बच्चो के करियर पर दें ध्यान, छोड़े नकारात्मक राजनीति, करे पहलवान बेटी का सम्मान – कृपाशंकर बिश्नोई |

भारत में कुल जनसंख्या का 0.1 प्रतिशत जाट हैं । फिर भी ठाठ है, 21वें राष्ट्रमंडल खेलों मेँ जाटो ने देश के लिये सबसे अधिक पदक जीतकर फिर बता दिया कि 5% जाट भारत की रीढ है । मेरा मानना है सभी समाज के लोगो को जाटो का अनुसरण करना चाहिए | नकारात्मक राजनीति को छोड़ कर देश हित में कार्य करना चाहिए | मुझे दुःख है की भारत में बिश्नोई लोगो को खेलो में कोई रूचि नहीं है | खेलों का ज्ञान नहीं होने के कारण राष्ट्रमंडल खेलों में जीते पदको की अहमियत का अकाल करने में बिश्नोई समाज असमर्थ है, यह बात समझने की जरूरत है की यह दौर नकारात्मक राजनीति का नहीं बल्कि सकारात्मक राजनीति का है नकारात्मक राजनीति करने से समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी होती है समाज के युवायो को नकारात्मक राजनीति करने से बचना चाहिए | राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जितना सांसद, विधायक और नेता बनने से बड़ी उपलब्धि है यह समाज के लोगो को समझना होगा, बच्चे खेलो के प्रति जागरूक तभी होंगे जब अभिभावको को खेलो के महत्व की जानकारों होगी | यह बात देश के प्रसिद्ध कुश्ती कोच कृपाशंकर बिश्नोई ने कही |

सभी को पता होना चाहिए की हाल ही में, बिश्नोई समाज व हिसार की पहलवान बेटी किरण बिश्नोई ने महिलाओं के 76 किग्रा भार वर्ग के कुश्ती मुकाबले में मॉरीशस की कताऊस्किया परिधावेन को एकतरफा अंदाज़ में 10-0 से हराकर राष्ट्रमंडल खेलों का कांस्य पदक जीता | इसी जीत के साथ उन्होंने एक कीर्तिमान भी स्थापित कर दिया | महिला हैवीवेट में पदक जितने वाली किरण देश की पहली महिला पहलवान बन गई है, इससे पहले, कोई भी भारतीय महिला पहलवान राष्ट्रमंडल खेलों के सुपर हेवीवेट में यह कारनामा नहीं कर पाई | इस महिला पहलवान का जितना सम्मान किया जाए उतना कम है | उन्होंने बिश्नोई समाज व हिसार बिश्नोई सभा और अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा से समाज की पहलवान बेटी किरण को सम्मानित करने के लिए आग्रह किया है | सम्मान खिलाड़ी के साहस को बढ़ाता है | ताकि किरण आगे अगस्त में होने वाले एशियाई खेलो में भी देश और समाज के लिए पदक जीते |

ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट सिटी में आयोजित 21वें राष्ट्रमंडल खेलों मेँ जाटो ने देश के लिये सबसे अधिक पदक जीतकर फिर बता दिया कि 5% जाट भारत की रीढ है । इसमें कोई दोराय नहीं की जाट खेलों के प्रति जल्दी जागरूक हो गए | हमें कम से कम खेलों में तो जाटों का अनुसरण कर लेना चाहिए | क्युकी ज्यादातर बिश्नोई जाट से ही बने हैं | सम्वत् 1542 की कार्तिक बदी 8 को जांभोजी महाराज ने एक विराट यज्ञ का आयोजन बीकानेर के पास सम्भराथल धोरे पर किया था, जिसमें सभी जाति व वर्ग के असंख्य लोग शामिल हुए । ज्यादातर बिश्नोई जाट से बने हैं जिन्हें बिश्नोई जाट भी कहा जाता है । गुरु जम्भेश्वर भगवान ने इसी दिन कार्तिक बदी 8 को सम्भराल पर स्नान कर हाथ में माला और मुख से जप करते हुए कलश-स्थापन कर पाहल (अभिमंत्रित जल) बनाया और 29 नियमों की दीक्षा एवं पाहल देकर बिश्नोई पंथ की स्थापना की ।

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