9:34 am - Monday June 25, 2018

ब्राह्मणों समाज से क्यों डरे खट्टर!!

चुनावी नुकसान के डर से हटाया भारती को
जाटों और दलितों के बाद ब्राह्मणों के भी बिदकने का था खतरा
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को ब्राह्मणों पर दिए गए आपत्तिजनक सवाल पर डिफेंसिव मोड में आते हुए आखिरकार अपने चहेते HSSC चेयरमैन भारत भूषण भारती को सस्पेंड करने का ऐलान करना पड़ा। अभी तक खट्टर कई विवादों के घेरे में आने के बावजूद भारती को लगातार बचाने का काम करते आए थे लेकिन ब्राह्मण समुदाय का विरोध इतना मुखर हो गया कि खट्टर को कड़वा फैसला लेना ही पड़ा। लेकिन इस मामले में भी मनोहर लाल खट्टर ब्राह्मणों को गुमराह करने का काम करते हुए भारती को हटाने की बजाय सिर्फ जांच पूरी होने तक सस्पेंड करने का आदेश जारी किया जबकि कानून के हिसाब से चेयरमैन को सस्पेंड नहीं किया जा सकता क्योंकि वह सरकारी कर्मचारी नहीं है उसे सिर्फ हटाया ही जा सकता है।
 जाहिर सी बात है ब्राह्मणों को शांत करने के लिए उनको सस्पेंड करने की नौटंकी की गई है और कुछ समय बाद जांच में उनको पाक साफ बताते हुए बहाल करने का काम कर दिया जाएगा। इस मामले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इसलिए झुकने को मजबूर हुए क्योंकि पूरे प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय ने इस मामले को लेकर व्यापक प्रदर्शन किए जिसके चलते यह लगने लगा कि अगर सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो वे भाजपा के खिलाफ खड़े हो जाएंगे ।
भाजपा पिछले चुनाव में फुल सपोर्ट करने वाले ब्राह्मण वोट बैंक को नाराज करने का खतरा मोल नहीं ले सकती इसीलिए उनको गोली देने के लिए भारती को सस्पेंड करने का ड्रामा रच दिया गया।
ब्राह्मण वोट बैंक क्यों है जरूरी?
 2014 के लोकसभा चुनाव में ही ब्राह्मण वोट बैंक कांग्रेस छोड़कर भाजपा के पाले में चला गया था ।उसके बाद विधानसभा चुनाव में भी रामविलास शर्मा की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के चलते ब्राह्मण वोटर पूरी तरह से लामबंद होकर भाजपा के पक्ष में खड़े हो गए थे। भाजपा को मिली ऐतिहासिक सफलता में ब्राह्मण वोटरों का भी अहम योगदान रहा था।रामबिलास शर्मा को मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने के कारण ब्राह्मण वोटर भाजपा से कुछ नाराज हो गए थे लेकिन उनको मनाने के लिए भाजपा ने डी बी वत्स को राज्यसभा का सांसद बना दिया। इसके अलावा रामबिलास शर्मा को भी नंबर दो का मंत्री बनाया गया। भाजपा को इस समय रामबिलास शर्मा के अलावा नरेश कौशिक, दिनेश कौशिक, मूलचंद शर्मा व टेक चंद शर्मा चार विधायक समर्थन दे रहे हैं। एचएसएससी परीक्षा में ब्राहमणो संबंधी विवादत सवाल के चलते इन विधायकों को अपने समुदाय में जवाब देना भारी पड़ रहा था। इसलिए उन्होंने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री को यह कह दिया था कि अगर इस मसले को शांत नहीं किया गया तो ब्राह्मण वोटबैंक भाजपा से नाराज होकर दोबारा कांग्रेस के पाले में जा सकता है।
 भाजपा ब्राह्मणों की नाराजगी को सहन करने की पोजीशन में नहीं है क्योंकि अगर ब्राह्मण वोट बैंक दोबारा से कांग्रेस के पास चला गया तो भाजपा को बड़ा सियासी नुकसान हो सकता है। इसलिए मुख्यमंत्री ने ब्राह्मणों को शांत करने के लिए भारत भूषण भारती को हटाने की बजाय सिर्फ सस्पेंड करने का ऐलान कर दिया ।
जाट हो चुके हैं पहले ही नाराज
 भाजपा सरकार से जाट समुदाय पहले ही नाराज चल रहा है। आरक्षण को लेकर हुए भारी आंदोलन व व्यापक उपद्रव के चलते जहां गैर जाट भाजपा सरकार के निकम्मेपन के कारण उससे खफा है वही अभी तक आरक्षण नहीं मिलने के कारण जाट वोटर भाजपा को कोस रहे हैं।
 पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में मोदी के नाम पर काफी संख्या में जाट वोटरों ने भी भाजपा को वोट दिए थे।भाजपा के टिकट पर छह विधायक कैप्टन अभिमन्यु, ओम प्रकाश धनखड़, सुभाष बराला प्रेमलता, ढांडा और सुखविंदर श्योराण विधायक बने थे। इनके अलावा बीरेंद्र सिंह को मोदी की सरकार में इसलिए मंत्री बनाया गया था ताकि जाट वोटरों को भाजपा के साथ जोड़ा जा सके लेकिन जाट आरक्षण आंदोलन को सही तरीके से हैंडल नहीं करने और आरक्षण देने में नाकाम रहने के चलते जाट वोटर भाजपा से पूरी तरह कन्नी काट चुके हैं।
 दलित वोटरों का भी मोहभंग
 SC /ST अधिनियम में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के चलते दलित वोटरों में भाजपा के प्रति भारी नाराजगी का आलम है। उन्होंने 2 अप्रैल के बाद बंद के दौरान पूरे देश में अपनी नाराजगी को व्यापक रूप दिखाने का काम किया था। भाजपा ने उनको शांत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डालने के अलावा अध्यादेश लाने का मन बना लिया है लेकिन अभी तक के घटनाक्रम से यही संकेत मिल रहे हैं कि दलित वोटों का भाजपा से तेजी से तेजी से मोहभंग हो रहा है जिसके कारण भाजपा को भारी राजनीतिक नुकसान होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
 अहीर वोटरों में भी भारी नाराजगी 
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत को प्रदेश सरकार द्वारा अनदेखा किए जाने के कारण अहिरवाल में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। राव इंद्रजीत अहिरवाल के सबसे कद्दावर नेता हैं और उन्हीं के बलबूते पर भाजपा अहीरवाल में दूसरे दलों का सूपड़ा साफ करने में सफल रही थी। भाजपा ने उनकी मदद से अहिरवाल में अपना जनाधार मजबूत करने की बजाय उनको ही काटने का काम किया जिसके चलते राव इंद्रजीत भी भाजपा में घुटन महसूस कर रहे हैं।पिछले दिनों उन्होंने महेंद्रगढ़ में बड़ी जनसभा करके यह संकेत दिया कि अगर उनको सही सम्मान नहीं दिया गया तो वह कोई भी फैसला ले सकते हैं।
 खरी खरी बात यह है कि 4 साल के दौरान भाजपा से जाटों व दलितों का जहां घोषित मोहभंग हो चुका है , वहीं पर HSSC परीक्षा सवाल विवाद के कारण ब्राह्मण गोत्र भी उसको छोड़ने का मन बना रहे हैं ।अगर जाटों और दलितों के बाद ब्राह्मण भी भाजपा से नाराज हो गए तो इन तीनों का संयुक्त आंकड़ा 50 फिसदी का हो जाता है। अगर आधे वोटर भाजपा से नाराज हो गए तो उसकी सत्ता में वापसी का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाएगा। इसलिए खिसकते वोट बैंक को बचाने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर ने ब्राह्मण समुदाय के आगे झुकते हुए भारती को सस्पेंड करने का फैसला लिया।

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