3:21 pm - Sunday December 11, 2016

राष्ट्रहित में उच्च शिक्षा संस्थानों में आरक्षण खत्म करें : Supreme Court

sc_1446022118सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रहित में अब यह जरूरी हो गया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों से आरक्षण खत्म कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि देश की आजादी के 68 साल बाद भी वंचितों की हालत जस की तस है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार इस संबंध में सकारात्मक कदम उठाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु राज्यों में सुपर स्पेशयलिटी कोर्सेस में एडमिशन के मानकों को चुनौती देने वाली याचिकाओं के फैसले के दौरान कही है। जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस पीसी पंत की बेंच ने कहा कि सुपर स्पेशयलिटी कोर्सेस में एडमिशन के मानदंड बनाने के लिए केंद्र और राज्यों को कई बार याद दिलाया गया, लेकिन हालात नहीं बदले।
जस्टिस दीपक मिश्र और पीसी पंत की बेंच ने यह सुझाव दिया। बेंच ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को कई बार कहने के बावजूद सुपर-स्पेशिएलिटी कोर्सों में मेरिट के आधार पर दाखिले नहीं दिए जा रहे हैं। हकीकत यह है कि ऐसे कोर्सों में योग्यता पर आरक्षण भारी पड़ जाता है।
शीर्ष कोर्ट ने इंडियन मेडिकल काउंसिल से संबद्ध संस्थानों में सुपर स्पेशिएलिटी कोर्सों में आरक्षण के आधार पर दिए गए दाखिलों पर फैसला सुनाते हुए कहा कि उच्च शिक्षा में कोई आरक्षण नहीं होना चाहिए। क्योंकि उच्च शिक्षा का स्तर सुधारना देशहित में होगा। इससे देश में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होगी।
कोर्ट ने कहा कि हमें उम्मीद है कि केंद्र और राज्य सरकार बिना देरी किए इस पर फैसला लेंगी। कोर्ट ने कहा, ‘उम्मीद अभी उम्मीद ही है। यह शाश्वत प्रतिस्पर्धा का समय है। विशेषाधिकार प्राप्त लोगों की स्थिति अब भी वही है।’sc_1446022118
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