11:29 pm - Tuesday December 6, 2016

सरल हैं सफलता के सूत्र, कुछ चीजों पर देना होगा ध्यान

सरल हैं सफलता के सूत्र, कुछ चीजों पर देना होगा ध्यानसफल व संपन्न लोग उस तरह से सोचते, महसूस करते और काम करते हैं, जिसके बारे में अधिकांश लोगों को पता नहीं होता। यहां मैं उन सूत्रों पर बात कर रहा हूं जो कि अपने- अपने कार्यक्षेत्र में सफल माने जाने वाले लोगों को पिछले 20 साल में दिए मेरे प्रशिक्षण पर आधारित हैं –
अच्छा होता है सनकी होना : आप अाइकन बन सकते हैं या समाज में फिट बैठ सकते हैं। लेकिन ये दोनों काम आप एक साथ नहीं कर सकते। इस दुनिया को सनकियों और विचित्र लोगों ने ही गढ़ा है। ये लोग बने ही ऐसे हैं कि इन्हें फिट होने की ज़रूरत नहीं पड़ती और यही उनके लिए फायदेमंद साबित होता है। यही वजह है कि उन्होंने बड़े लक्ष्य रखे और आसपास की नकारात्मक बातों को नज़रअंदाज़ करते हुए उन्हें पाया भी। अपने भीतर की आवाज पर भरोसा रखें। उन्हें खुद से दूर रखें जो आपको नहीं समझते। आगे बढ़ें और अपने सपनों को पूरा करें। अंतत: आप जीनियस माने जाएंगे।
सपने चुराने वालों को रखें दूर : मेरा जीवन सिर्फ एक फैसले से बदल गया: अपनी दुनिया में ऊर्जा चूसने वाले पिशाचों और सपने चुराने वाले लोगों को प्रवेश न करने देना और सरलता, उत्पादकता और मानवता के गुणों से युक्त लोगों का स्वागत करना। ऐसे लोगों से जुड़ाव ने मेरी सीमाओं को तोड़ा, मेरे लिए मानसिक, भावनात्म‍क, वित्तीय और आध्यात्मिक संभावना की उस दुनिया के द्वार खोले, जिसने मेरे नतीजों को इतनी अधिक गति दी। आप आर्थिक रूप से कभी स्वतंत्र नहीं हो सकते, यदि आप अपने जीवन में स्वयं से बड़े विचारकों और बेहतर प्रदर्शन करने वालों को शामिल नहीं करते।
अपने मास्टरपीस पर फोकस : पचास किताबें लिखने की क्यों ज़रूरत है जबकि केवल एक, द प्रोफेट या हाऊ टूविन फ्रेंड्स या हैरी पॉटर लिखना ही आपके लिए काफी है? अपने इकलौते मास्टरपीस (उत्कृष्ट कृति) पर ध्यान केंद्रित करें जो कि आपका ताजमहल है, आपका सिस्टीेन चैपल है। आपकी मूनवॉक है। अनेक महान कंपनियों और जिंदगियों को बर्बाद करने वाली चीज़ों में से एक है, जीवन में मिलने वाले अनेक अवसरों को लक्ष्य‍ बनाना, बजाय इसके कि उनमें से एक बेहतरीन पर पूरे जोश और जुनून के साथ जुट जाना।
सबसे खतरनाक जगह है सफलता : जिस तरह से सफलता विफल होती है, उस तरह बहुत ही कम चीजें विफल होती हैं। चोटी पर पहुंचना और वहां पहुंचने के बाद वह सब करना बंद कर देना सबसे आसान होता है, जिनके कारण अाप वहां तक पहुंचे। असली जाल यही है कि जिस पल आप उत्कृष्ट बन जाते हैं, आप सोचने लगते हैं कि आप उत्कृष्ट बन गए। याद रखिए उस्ताद कभी उस्तादों की तरह नहीं, बल्कि शागिर्दों की तरह सोचते हैं। इसलिए वे उस्ताद बने रहते हैं।
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