7:57 am - Monday September 25, 2017

13 सरकारी यूनिवर्सिटी और संबद्ध कॉलेजों में 1550 शिक्षक एडहॉक पर, 1150 पढ़ाने के योग्य ही नहीं

एजुकेशन का हब बन रहे हरियाणा में हायर एजुकेशन की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। वर्ष 2005 में कांग्रेस राज में मिली छूट के बाद प्रदेश में कान्वेंट स्कूल की तरह विश्वविद्यालय खुलने लगे। आज 22 जिलों वाले हरियाणा में 41 यनिवर्सिटी हैं। इनमेें 13 सरकारी, 20 प्राइवेट और 6 डीम्ड हैं। इन विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में 1550 शिक्षक एडहॉक पर रखे गए हैं, इनमें 1150 से ज्यादा शिक्षक यूजीसी के नियमानुसार पढ़ाने की योग्यता भी पूरी नहीं करते।
ज्यादातर कॉलेजों में 30 से 50 प्रतिशत तक गेस्ट लेक्चरर हैं, इनकी भर्ती 2009 के नियम से की गई थी। जिसमें इन्हें छूट मिल गई थी कि यदि ज्यादा जरूरत है तो नेट और पीएचडी के अलावा पोस्ट ग्रेजुएट लेवल पर भी शिक्षक रखे जा सकते हैं। ऐसे में कई कॉलेजों में 5 साल से ये शिक्षक एडहॉक पर नौकरी कर रहे हैं तो कहीं दो वर्षों से कार्यरत है। कहीं-कहीं हर साल रिन्यूवल किए जाते हैं। इस समय रेवाड़ी में करीब 45, नारनौल-महेंद्रगढ़ के 70, भिवानी के 65, रोहतक के 50 समेत अन्य सभी जिलों में 50 से 80 शिक्षक एडहॉक या गेस्ट लेक्चरर्स के रूप में लगे हैं। हालांकि अब यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि कोई लेक्चरर बिना नेट क्वालीफाई और पीएचडी के चयनित नहीं किया जाएगा, जिसका 1100 से ज्यादा शिक्षक विरोध कर रहे हैं। कुछ कॉलेज भी इसके विरोध में उतर आए हैं, उनका कहना है कि अचानक हुए इस फैसले से व्यवस्था बिगड़ सकती है। पहले से एडहॉक और गेस्ट के तौर पर लगे शिक्षकों को अपनी योग्यता पूरी करने का मौका देना चाहिए।
केयू में करीब आधे शिक्षक कांट्रैक्ट पर
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी- केयू में 398 नियमित शिक्षक हैं वहीं 370 कांट्रेक्ट पर रखे गए हैंं। एमएचआरडी की ओर से नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क में केयू को 95वां रैंक और यूनिवर्सिटी में 59वां रैंक मिला है। नैक की ओर से सितंबर के पहले पखवाड़े में टीम यूनिवर्सिटी का मूल्यांकन करने के लिए आएगी। यहां कांट्रेक्ट शिक्षकों की योग्यता भी नेट और पीएचडी ही है लेकिन नेट व पीएचडी न मिलने पर एमफिल व एमए को भी नियुक्ति दे दी जाती है। कांट्रेक्ट शिक्षकों को 27 हजार वेतन देने का प्रावधान यूनिवर्सिटी ने अगस्त महीने से किया है। वर्तमान तक शिक्षकों को 21600 रुपए वेतन मिल रहा है।
वाईएमसीए – फरीदाबाद की वाईएमसीए सांइस एंड टेक्नॉलोजी यूनिवर्सिटी में कुल 251 शिक्षक हैं। जिनमें 131 शिक्षक रेगुलर और 119 एडहॉक, कॉन्ट्रैक्ट बेस पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी में 15 विजिटिंग फैकल्टी भी है। एडहॉक पर तैनात शिक्षकाें को 30 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। शिक्षकों की एडहॉक बेस पर नियुक्ति सीधे विश्वविद्यालय करता है। यूनिवर्सिटी का नैक ग्रेड ए है। यह हरियाणा की एकमात्र टेक्निकल यूनिवर्सिटी है।
सीडीएलयू :62 शिक्षक रेगुलर, 114 एडहॉक पर-सिरसा में चौधरी देवीलाल युनिवर्सिअी में में नियमित तौर पर 62 शिक्षक और अनुबंध पर 114 शिक्षक तैनात हैं। एडहॉक पर तैनात शिक्षकों को अभी तक 21,600 वेतन मिलता है। ये शिक्षक सीडीएलयू में डायरेक्ट भर्ती किए जाते हैं। यहां औतसन 16 स्टूडेंट पर एक शिक्षक है। सीडीएलयू को नैक से बी ग्रेड प्राप्त है।
चौधरी रणवीर सिंह यूनिवर्सिटी-
जींद की चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी में छह प्रोफेसर रेगुलर और 52 एडहॉक पर लगाए गए हैं। यहां एडहॉक पर लगे शिक्षकों को करीब 25 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जाता है। हालांकि विवि प्राशासन के अनुसार सभी शिक्षक नेट क्वालिफाई हैं पर पीएचडी 50 % ही हैं। इनका इंटरव्यू के जरिए सिलेक्शन किया जाता है। अभी विश्वविद्यालय को नैक से कोई ग्रेडिंग नहीं मिली है। पिछले साल यूजीसी की 12बी के लिए इंस्पेक्शन हुआ है।
तीन तरह से रखे जाते हैं शिक्षक
रेगुलर एडहॉक गेस्ट लेक्चरर
सार्वजनिक सूचना के जरिए कमेटी नेट, पीएचडी, शोध प्रकाशन आदि योग्यता व इंटरव्यू के आधार पर चयन करती है। रेगुलर शिक्षकाें का वेतन पे-स्केल (65 हजार और उससे अधिक) होता है।
नेट-पीएचडी अभ्यर्थी ना मिलने पर मास्टर डिग्री वाले नियुक्त होते हैं। वेतन 21 हजार से 27 हजार होता है। नियमानुसार इनका फैसला भी इंटरव्यू के बाद ही होना चाहिए। लेकिन नियम ताक पर होते हैं।
इनके चयन के मानक भी यूजीसी के दिए हुए हैं, लेकिन इनमें विश्वविद्यालय और कॉलेज अपनी सुविधानुसार चयन कर लेते हैं। इन्हें प्रतिघंटे के हिसाब से प्रति लेक्चर 650-800 रुपए भुगतान किया जाता है।
250 कॉलेजों ने आज तक नहीं कराई ग्रेडिंग
प्रदेश में 21 यूनिवर्सिटी और 250 कॉलोजों की नैक से ग्रेडिंग तक नहीं हुई है। वहीं, 13 सरकारी यूनिवर्सिटी से संबद्ध करीब 400 कॉलेजों में से, 250 की ग्रेडिंग नहीं है। इस कारण इन्हें यूजीसी की ग्रांट नहीं मिलती। 150 कॉलेजों ने ग्रेडिंग करवाई वह भी सिर्फ पहले चरण की, दूसरे, तीसरे की तैयारियां उनमें भी पूरी नहीं हैं।
यूनिवर्सिटी, कॉलेजों में 80% शिक्षक रेगुलर हों, प्राइवेट के लिए बने रेगुलेटरी कमीशन
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सभी विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों में 80% टीचिंग स्टाफ रेगुलर होना चाहिए। हमें विदेशों की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज का मुकाबला करने की होड़ करनी होगी। मैनपाॅवर सर्वे करके ही कोर्स शुरू होने चाहिए। सिलेबस समाज की जरूरत के मुताबिक तय किए जाएंं। कोर्स के पीछे सिर्फ पैसा कमाना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए। एकेडमिक स्टैंडर्ड अपनाना होगा। गर्वनमेंट यूनिवर्सिटीज में जिस तरह से सेल्फ फाइनेंस कोर्स चल रहे हैं, प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में फीस स्ट्रक्चर उसी तर्ज पर बनाया जा सकता है। आज प्रदेश में प्राइवेट यूनिवर्सिटी जिस ढर्रे पर चल रही हैं, वह सही नहीं है। ये हायर एंड फायर की नीति पर चल रही हैं। शिक्षकों को दस हजार रुपए वेतन देती हैं। जाहिर है इतने कम वेतन में कैसे बेहतर शिक्षण कार्य हो सकता है। यही वजह है कि इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र को काफी नुकसान हुआ है। इंजीनियर तो पैदा हो रहे हैं, लेकिन स्टैंडर्ड की कमी है। प्राइवेट यूनिवर्सिटी के लिए कोई रेगुलेटरी कमीशन होना चाहिए।
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