7:21 pm - Sunday December 11, 2016

छह जातियों के आरक्षण पर HC द्वारा लगाई रोक जारी, अब 29 को पेशी

high-court-haryana
जाट समेत छह जातियों को पिछड़े वर्ग के तहत दिए गए आरक्षण के लाभ पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक जारी रखते हुए 29 नवंबर के लिए मामले पर अगली सुनवाई तय की है।
याची पक्ष की तरफ से जिरह आरंभ करते हुए कहा गया कि सामाजिक और आर्थिक दोनों आधार पर पिछड़ने होने पर ही आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है। जिन छह जातियों को आरक्षण का लाभ दिया गया उनके सामजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े होने के आंकड़े ही एकत्रित नहीं किए गए ऐसे में यह आरक्षण गलत है। याची का पक्ष पूरा न होने पर हाईकोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी। हरियाणा सरकार ने एक्ट के माध्यम से जाटों समेत छह जातियों के लिए के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था। इसको चुनौती देते हुए मुरारी लाल गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका मेंं कहा गया था कि किसी भी स्थिति मेंं आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है।
हरियाणा सरकार ने इन जातियों को आरक्षण देने के लिए न तो कोई सर्वे करवाया न ही सरकार के पास कोई आंकड़े हैं। ऐसी स्थिति में हरियाणा सरकार द्वारा दिया गया आरक्षण लाभ गलत है। हरियाणा सरकार ने केसी गुप्ता आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आरक्षण दिया है जिसे पहले ही सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। याची पक्ष की ओर से कहा गया कि अतिविशिष्ट परिस्थितियों में ही आरक्षण को 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाया जा सकता है परंतु यहां ऐसा नहीं था।
हाईकोर्ट ने याची की दलीलों को सुनने के बाद इन छह जातियों को दिए गए आरक्षण लाभ पर पहले ही रोक लगा दी थी। हरियाणा सरकार की ओर से जिरह में पहले कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की सूची में जाटों को आरक्षण देने का मामला था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की सूची के मामले में अपना फैसला सुनाया था न की राज्य की सूची के मामले में। इसके साथ ही
हरियाणा सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केसी गुप्ता आयोग की सिफारिशों को खारिज नहीं किया था बल्कि उन्होंने एनसीबीसी की रिपोर्ट को मंजूरी दी थी जिसमें केसी गुप्ता आयोग की सिफारिशों को न मानने का फैसला लिया गया था। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट ने केसी गुप्ता आयोग की सिफारिशों को खारिज किया था।
Filed in: News

No comments yet.

Leave a Reply

*
error: Content is protected !!