5:14 pm - Saturday March 25, 2017

युवाओं के अवसर कम होने की वजह से जिस फैसले को पलटा उसी पर बढ़ी सरकार, रिटायरमेंट की उम्र 60 करने की तैयारी

सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र 58 साल से बढ़ाकर 60 की जाएगी। गुरुवार को कैबिनेट की मीटिंग में यह निर्णय लिया गया है। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की अध्यक्षता में एक उप समिति बनाई गई है, कमेटी एक माह में रिपोर्ट देगी। यह पूर्व की हुड् डा सरकार का वही फैसला है जिसे सवा दो साल पहले सत्ता में आते ही खट् टर सरकार ने रद्द कर दिया था। तब इसके पीछे युवाओं के रोजगार में अवसर की कमी का कारण बताया गया था। अब सरकार उसी पर आगे बढ़ी है। इसका लाभ उन कर्मचारियों को भी मिलेगा जो 2 साल में रिटायर हो चुके हैं। बशर्ते उनकी उम्र 60 से अधिक न हो। ऐसे कर्मचारी री-इंप्लॉयमेंट के लिए आवेदन कर सकेंगे। वहीं प्रदेश में बायो डीजल को वैट मुक्त कर दिया गया है। इससे 1.50 से 2 लाख रुपए सालाना टैक्स मिलता था।कैबिनेट मीटिंग के बाद सीएम मनोहर लाल ने बताया कि कई विभागों में कर्मचारियों की कमी है। इसे दूर करने को रिटायर हो चुके कर्मचारियों को 60 साल की आयु तक री-इंप्लॉयमेंट करने का फैसला किया है। साथ ही मौजूदा सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट एज 58 से 60 वर्ष करने के लिए बनाई गई सब कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कोई फैसला होगा।

हालांकि युवाओं की भर्ती प्रक्रिया कर रही है लेकिन इसमें वक्त लग रहा है। एक सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि ये फैसला न तो राजनीतिक कारणों से लिया गया है और न ही चुनाव अथवा विपक्ष के दबाव में। सरकार के इस यू टर्न पर सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा का कहना है कि तब सरकार का तर्क था कि इससे बेरोजगारों को रोजगार के ज्यादा अवसर मिलेंगे। अब सरकार यह भी बताए कि बेरोजगारों के रोजगार का क्या होगा? क्या वे प्रभावित नहीं होंगे?

शिक्षा मंत्री की सलाह पर सीएम ने किया विचार : सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट मीटिंग में रिटायर कर्मचारियों को री-इंप्लाई करने के बिंदु पर चर्चा हो रही थी। पिछली कई कैबिनेट मीटिंगों में इस तरह के 1-1, 2-2 मामले मंजूर होते आ रहे थे। इस बार जब यह बिंदु आया तो सीएम मनोहर लाल ने कहा कि इसके लिए कोई पॉलिसी बनानी चाहिए। इससे बाकी लोगों के साथ नाइंसाफी होती है। इसी बीच, संसदीय कार्य मंत्री रामबिलास शर्मा ने कर्मचारियों की रिटायरमेंट एज ही 58 से बढ़ाकर 60 साल करने का आग्रह किया। इस पर सीएम ने कहा कि रिटायरमेंट एज बढ़ाने का फैसला तुरंत तो नहीं किया जा सकता। क्योंकि इसके वित्तीय, प्रशासनिक और अन्य पहलू भी देखने पड़ेंगे। इसलिए एक कैबिनेट सब कमेटी बना देते हैं, और कमेटी बन गई।

पूर्व सीएम हुड् डा के फैसले को यूं पलटा था खट्टर ने : हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट एज 58 से बढ़ाकर 60 साल करने का फैसला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विधानसभा चुनाव के ऐन पहले किया था। फैसला 1 नवंबर, 2014 से लागू होना था। लेकिन सत्ता बदलने की वजह से सीएम मनोहर लाल के नेतृत्व वाली सरकार ने यह फैसला पलट दिया। खट्टर सरकार का तर्क था कि इससे युवाओं को रोजगार के अवसर ज्यादा मिलेंगे। इसके करीब 5000 कर्मचारी तो नवंबर,2014 में ही रिटायर हो गए। उसके बाद से हर महीने कर्मचारी रिटायर होते आ रहे हैं। अब पंजाब विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में भाजपा ने वहां के कर्मचारियों से रिटायरमेंट एज 58 से बढ़ाकर 60 साल करने का वायदा किया है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा तो फजीहत से बचने के लिए हरियाणा सरकार ने फैसला लिया। हालांकि इससे पहले सरकार डॉक्टरों की रिटायरमेंट एज 58 से बढ़ाकर 65 साल करने का फैसला कर चुकी है।

प्रदेश के किसान अब मार्केट रेट पर खुद बेच सकेंगे अपनी जमीन :- नई लैंड परचेज पॉलिसी के तहत किसान या भूमि मालिक मार्केट रेट से सरकार को जमीन बेच सकेगा। प्रदेश में अब जमीन जबरन अधिग्रहण नहीं की जाएगी। इसके लिए वेबपोर्टल बनाया जा रहा है। इस पर कोई भी जमीन बेचने का प्रस्ताव दे सकेगा। उसके प्रस्ताव का राजस्व विभाग समेत अन्य मूल्यांकन करेंगे, रेट पर बात बनी तो जमीन खरीद ली जाएगी। अस्पताल, स्कूल, कॉलेज आदि के लिए एग्रीगेटर के माध्यम से बड़ा भू-भाग या छोटे-छोटे टुकड़ों में भी जमीन खरीदी जा सकेगी। इससे विकास कार्यों के लिए सरकार को जमीन उपलब्ध होने की उम्मीद है।

एचसीएस नॉमिनेशन के नियम बदले, मनमानी खत्म होगी :- हरियाणा सिविल सर्विसेज (एचसीएस) में नॉमिनेशन में मनमानी को रोकने के लिए सरकार ने नियमों में संशोधन मंजूर किया है। अब एचसीएस बनने के लिए आवेदक की न्यूनतम आयु 42 साल और 8 साल का अनुभव जरूरी होगा। यानी 50 साल की आयु में एचसीएस बन पाएंगे। पहले अनुभव 8 साल व आयु सीमा 45 साल थी, लेकिन केस-टू-केस सरकार आयु सीमा में छूट देती रही है। सीएम मनोहर लाल का दावा है कि अब ऐसा नहीं किया जा सकेगा। इस फैसले से तहसीलदार, नायब तहसीलदार, डीआरओ आदि को फायदा मिलेगा।

विधानसभा का बजट सत्र 27 से : विधानसभा का बजट सत्र सोमवार 27 फरवरी से शुरू होगा। इसकी वजह यह है कि केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य की भाजपा सरकार भी अपना बजट करीब 20-25 दिन पहले पेश करेगी। पहले राज्य का बजट मार्च के दूसरे या तीसरे सप्ताह में पेश होता था, लेकिन इस बार यह पहले सप्ताह में ही पेश होने की उम्मीद है। सरकार ने बजट के लिए 7 प्राथमिकताएं तय की हैं। इनमें महिला सशक्तिकरण, यूथ डेवलपमेंट आदि प्रमुख हैं।

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