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जाट आरक्षण मामला: याचिका पक्ष ने की हाईकोर्ट से केस दूसरी बेंच को ट्रांसफर करने की अपील

जाट आरक्षण को लेकर आज पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने आज मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की अपील की। सुनवाई कर रहे दोनों जजों को जाति के आधार पर देखते हुए याची ने संभावना जताई कि इससे मामले की सुनवाई बाधित हो सकती है। इसलिए याची पक्ष ने मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है।

इससे पहले आज सरकार जाटों से बातचीत करने का रास्ता निकालते हुए एक कमेटी का भी गठन कर चुकी है, जो जाटों से बातचीत करेगी। हालांकि जाट अब भी प्रदेश भर में धरनों पर बैठे हुए हैं। उधर हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

अंतरिम रोक मामले में आज हुई सुनवाई :- हरियाणा में जाटों समेत 6 जातियों को आरक्षण पर लगी अंतरिम रोक मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस सुनवाई में याचिका पक्ष ने केस दूसरी बेंच को ट्रांसफर करने की अपील की है। बुधवार को फिर इस मामले की सुनवाई होगी। आपको बता दें कि याचिकाकर्ता के अनुसार जाटों को आरक्षण मिलने के बाद प्रदेश में आरक्षण 50 फीसदी के पार पहुंच चुका है। इसके अलावा जाटों को जिस आधार पर आरक्षण मिला है वो वर्टिकल है जबकि इसका कुछ हिस्सा हॉरीजोंन्टल भी होना चाहिए था।

गौरतलब है कि हिंसक जाट आरक्षण आंदोलन के बाद हरियाणा सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में काननू पास करवाकर जाटों को ओबीसी कोटे का 10 फीसदी आरक्षण दिया था। कुछ दिन बाद ही इसे हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई थी। वहीं हरियाणा सरकार ने जाट आंदोलन के बाद आरक्षण की घोषणा कर दी थी, जिसमें जाटों सहित 6 जातियों को आरक्षण ओबीसी के तहत रिजर्वेशन देने का प्रावधान था। इसके खिलाफ मई माह में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी तो हाईकोर्ट ने 21 जुलाई तक की अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद से लगातार ये मामला कोर्ट में विचाराधीन है। 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण को गलत करार देने की याचिकाकर्ता की दलील पर हरियाणा सरकार ने कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर में उल्लेखित अति विशेष परिस्थितियों वाली टिप्पणी का हवाला दिया कि कुछ निर्धारित प्रक्रिया को पूरा कर आरक्षण को 50 प्रतिशत से ऊपर ले जा सकते हैं। केसी गुप्ता आयोग पर हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि आयोग की रिपोर्ट को सिरे से खारिज नहीं किया गया है। सरकार की तरफ से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक ही डाटा एकत्रित करते हुए आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

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