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सरकारी नौकरी के लिए पदाधिकारी पर रु. लेने का आरोप, संयोजक ने कहा- सदस्यों को हम नहीं बचाएंगे तो कौन बचाएगा

प्रदेश सरकार की ओर से गड़बड़ियों पर नजर रखने के लिए गठित निगरानी कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

प्रदेश सरकार की ओर से गड़बड़ियों पर नजर रखने के लिए गठित निगरानी कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। सीएम विंडो व अन्य शिकायतें के आधार पर अफसरों को शक की नजर से देखने वाली यह कमेटी अपनी सत्ताधारी भाजपा पार्टी के पदाधिकारियों से जुड़े एक मामले में कार्रवाई की बजाए बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले पार्टी के पदाधिकारियों पर सरकारी नौकरी के नाम पर लोगों से लाखों रुपये ऐंठने का आरोप लगा है।

फतेहाबाद क्षेत्र के विभिन्न गांवों के लोगों ने लोकसभा निगरानी समिति के संयोजक भारत भूषण मिड्ढा को करीब एक महीने पहले शिकायतें दी थी। इसमें बताया था कि भाजपा के कुछ पदाधिकारी सरकारी नौकरी दिलवाने के नाम पर लोगों से रुपये ले चुके हैं। किसी से 90 हजार तो किसी से 3 लाख तो किसी से 1 एक लाख रुपये लिए गए है, लेकिन किसी को सरकारी नौकरी लगवाया ही नहीं।

लोगों ने रुपए वापस मांगे तो बोले, वो रहा थाना वो रहा एसपी, करवा लो जो करवाना है :- सरकारी नौकरी के नाम पर रुपये लेने वाले पदाधिकारी की रिकॉर्डिंग भी है। जिसमें भाजपा की एक महिला पदाधिकारी रुपये लेने की बात कबूल रही है। जब नौकरी न लगने पर एक युवक रुपये वापस देने की बात करता है तो वह युवक को कुछ दिनों का समय मांगते हुए कहते है कि ऊपर से रुपये नहीं आए। आएंगे तब ही मिलेंगे। जब शिकायतकर्ता युवक ने कहा कि उसे रुपये चाहिए तो भाजपा पदाधिकारी ने युवक को जवाब देते हुए कह रही है कि वो रहा थाना और वो रहा एसपी। जाओ जो मर्जी करवा लो। नहीं मिलते रुपये।

पदाधिकारी को बचाने के लिए मामला रखा पेडिंग :- सरकारी नौकरी के नाम पर भाजपा पदाधिकारी द्वारा रुपए लेने बारे गांव बड़ोपल, गांव धांगड़, गांव खाराखेड़ी समेत कई अन्य गांव के लोग निगरानी कमेटी के सिरसा लोकसभा निगरानी कमेटी के संयोजक भारत भूषण मिड् ढा को शिकायत सबूतों सहित दिए काफी दिन बीत गए हैं। शिकायत पर कार्रवाई करने की बजाय उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। जिससे उनकी पार्टी की बदनामी न हो और पदाधिकारी भी न फंसे। निगरानी समिति की इस कार्यशैली पर संशय पैदा हो गया है कि वह भाजपा पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करना चाहती है। कही इस मामले में बीजेपी के पदाधिकारी के अलावा अन्य कई बड़े पार्टी के सदस्य तो नहीं फंस रहे हैं।

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