11:00 pm - Wednesday February 22, 2017

दो बार बढ़ी तारीख फिर भी डॉक्टरों के 662 पदों पर 2 हजार आवेदन, ज्यादातर फ्रेशर

प्रदेश में 2 हजार सरकारी चिकित्सक, 1250 पद भरने में हो रही दिक्कत

  • 2015 में 761 सीटों के लिए आवेदन मांगे थे, जिसमें 1300 आवेदन आए थे
  • 150 डॉक्टरों ने ही किया था ज्वाइन
  • 2 हजार डॉक्टर, 1250 की और जरूरत
  • 31 दिसंबर 2016 से बढ़ाकर 31 जनवरी की थी आवेदन तिथि
  • ट्रांसफर, एमएलआर पोस्टमार्टम ड्यूटी बड़ी वजह
  • बैच पास आउट होने के बाद ही बढ़े आवेदन
  • मेडिकल सर्विसेज एसो. का तर्क :गलतनीतियों के कारण सरकारी सेवा में नहीं आना चाहते डॉक्टर

प्रदेश में हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस में मेडिकल ऑॅफिसर की कुल 662 पदों के लिए 2 हजार डॉक्टरों ने ही आवेदन किए हैं। 50 डॉक्टरों के फार्म रद्द हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर डॉ. विजय गर्ग के मुताबिक मार्च में मेडिकल ऑफिसर के लिए आवेदकों के साक्षात्कार होंगे। 2015 में भी स्वास्थ्य विभाग ने 761 सीटों के लिए आवेदन मांगे थे, जिसमें 1300 आवेदन आए थे। जिसमें से 150 डॉक्टरों ने ही ज्वाइन किया था। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के प्रधान डॉ. जसबीर परमार इसे सरकार की गलत नीतियों का परिणाम बता रहे हैं।

प्रदेश के सरकारी अस्पताल स्वास्थ्य केंद्रों में मात्र 2 हजार डॉक्टर ही उपलब्ध हैं, जबकि 1250 पद रिक्त पड़े हैं। इनको भरने के लिए स्वास्थ्य विभाग दो साल में दो बार आवेदन मांग चुका है, लेकिन दोनों ही बार बैचलर ऑफ मेडिसन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी (एमबीबीएस) के छात्रों ने सरकार की जॉब में कम दिलचस्पी दिखाई। जून 2015 में स्वास्थ्य विभाग ने कुल 761 पदों पर एमओ (मेडिकल आफिसर) के आवेदन मांगे। राज्य भर से इसके लिए लगभग 1300 अावेदन आए। आवेदकों के साक्षात्कार लेने के बाद विभाग ने अपनी चयनित डॉक्टरों की सूची जारी की थी। पहले 15 दिन में राज्य भर से केवल 80 डॉक्टरों ने ही ज्वाइन किया था। 15 दिन और ज्वाइनिंग डेट बढ़ाने के बाद भी राज्य से केवल 150 डॉक्टरों ने ही ज्वाइन किया था।

रिक्त पदों को भरने के लिए विभाग ने दिसंबर 2016 में 662 पदों के लिए अावेदन मांगे, लेकिन 31 दिसंबर तक केवल 150 डॉक्टरों ने ही हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस के लिए अप्लाई किया था। सरकार ने आवेदन पूरे करने के लिए इसकी लास्ट बढ़ाकर 31 जनवरी की थी। अंतिम दिन तक स्वास्थ्य विभाग के पास कुल 2 हजार आवेदन जमा हुए है।

हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के राज्य प्रधान डॉ. जसबीर परमार ने कहा कि डॉक्टर सरकार की नीतियों के कारण सरकारी नौकरी नहीं करना चाहते। हर बार डॉक्टर आवेदन करने के बाद ज्वाइन नहीं करते। ज्वाइन करने के बाद काफी डॉक्टर नौकरी छोड़ देते है। सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी सही नहीं है। डॉक्टरों को अपना घर छोड़कर नौकरी करनी पड़ती है। डॉक्टरों को उनकी डयूटी से हटाकर अतिरिक्त काम दिए जाते है। मरीजों का इलाज छोड़कर मेडिको लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) पोस्टमार्टम ड्यूटियां करनी पड़ती है। फील्ड में जाकर लोगों की पेंशन बनाने का कार्य दे दिया जाता है। डॉक्टरों को काफी कम भत्ता मिलता है। डॉक्टर स्वास्थ्य केंद्रों में सुरक्षित नहीं है। सरकार की इन नीतियों के कारण डाॅक्टर सरकारी नौकरी नहीं करना चाहते। 2015 में केवल 150 नए एमओ ने ही ज्वाइन किया था। सरकार को स्वास्थ्य केंद्रों में सीटें भरने के लिए अपनी पॉलिसियों में सुधार करना होगा।

एमओ के पद के लिए 31 दिसंबर तक महज 150 आवेदन आए थे। दिसंबर के अंत में हरियाणा के 7 मेडिकल कॉलेजों बीपीएस गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज फॉर वीमेन, खानपुर गोल्ड फील्ड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसोर्सेज भालगढ़, महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च अग्रोहा, पंडित भगवत दयाल शर्मा पीजी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल कॅालेज, रोहतक, शहीद हुसैन खान मेवाती गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, मेवात, श्री गुरु गोबिंद सिंह ट्री सेंटेनरी मेडिकल कॉलेज, गुड़गांव मेडिकल कॉलेज आफ मोलाना से एमबीबीएस का बैच पास आउट हुआ। जिसके बाद आवेदनों की संख्या बढ़ी थी।

Filed in: Jobs

No comments yet.

Leave a Reply

*

error: Content is protected !!