10:49 pm - Monday June 18, 2018

खट्टर का बड़ा फैसला, हरियाणा में अब बच्चियों के रेपिस्टों को फांसी पर लटकाया जायेगा

चण्डीगढ़, 27 फरवरी- हरियाणा में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों से जुड़े मौजूदा आपराधिक कानूनों को मौत की सजा समेत सजा में वृद्धि करके और अधिक कठोर बनाया गया है ताकि अपराधियों पर अंकुश लगाया जा सके।

महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376ए, 376डी, 354, 354डी(2) जैसे कानूनों में संशोधन करने का निर्णय लिया गया। बारह वर्ष तक की आयु की महिला के साथ बलात्कार या सामूहिक बलात्कार के मामले में मृत्यु की सजा या कम से कम 14 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा हो सकती है जो आजीवन कारावास अर्थात व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन की शेष अवधि तक बढ़ाई जा सकती है।
भारतीय दंड संहिता की धारा 376 एए के तहत जोड़ी गई धारा के अनुसार, जो कोई भी 12 वर्ष तक की आयु की किसी महिला से बलात्कार करता है, उसे मृत्यु या 14 वर्ष तक के सश्रम कारावास की सजा हो सकती है, परंतु उसे उस व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन की शेष अवधि के लिए कारावास तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376 डी ए के तहत एक अन्य प्रावधान किया गया है कि यदि समूह बनाकर एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा 12 वर्ष तक की आयु की किसी महिला का बलात्कार किया जाता है या वे सामान्य इरादे के तहत ऐसा करते हैं, तो उन सभी व्यक्तियों को बलात्कार का दोषी मनाया जाएगा और मृत्यु की सजा या कम से कम 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया जाएगा, जो जुर्माने के साथ उस व्यक्ति के प्राकृतिक जीवन की शेष अवधि तक बढ़ाई जा सकती है। इस तरह का जुर्माना पीडि़त के चिकित्सा खर्चों और पुनर्वास सम्बन्धी जरूरतों को पूरा करने के लिए न्यायोचित और तर्कसंगत होगा। इस धारा के तहत लगाया गया जुर्माना पीडि़त को दिया जाएगा।

भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत, जो व्यक्ति शीलभंग करने के इरादे से या यह जानते हुए कि इससे उसका शीलभंग हो सकता है, किसी महिला पर हमला करता है या आपराधिक बल प्रयोग करता है, तो उसे कम से कम दो साल के कारावास की सजा होती है, जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
इसके अलावा, भारतीय दंड संहिता की धारा 354 डी (2) के तहत, यदि कोई व्यक्ति अपराध करता है या पीछा करता है, तो उसे पहला दोष सिद्ध होने पर अधिकतम तीन साल तक के कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है। दूसरी बार या अनुवर्ती दोष सिद्ध होने पर उसे कम से कम तीन वर्ष के कारावास की सजा हो सकती है, जिसे जुर्माने के साथ सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

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