12:47 am - Wednesday April 18, 2018

वायरल आडियो मामले में HSSC के चेयरमैन पर घूसख़ोरी के आरोपों पर हाई कोर्ट की देखरेख में उच्च स्तरीय जाँच हो – सुरजेवाला

अखिल भारतीय कांग्रेस मीडिया प्रभारी व वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि पिहोवा में वायरल आडियो मामले में हरियाणा स्टाफ स्लेक्शन कमीशन के चेयरमैन पर घूसख़ोरी के आरोपों पर हाई कोर्ट की देखरेख में उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए क्योंकि यदि पालिका अध्य़क्ष बनाने के लिए कथित रुप से 75 लाख रुपये ले सकते हैं तो प्रदेश में हज़ारों नौकरियां लगाने के नाम पर कितनी रक़म ली होगी। सुरजेवाला आज शाहबाद के लाडवा रोड़ पर विशाल रामलीला ग्राउंड पर पूर्व विधायक अनिल धंतोडी़ द्वारा आयोजित ‘बदलाव रैली’ को सम्बोधित कर रहे थे। रैली में इलाक़े से हज़ारों लोगों ने भाग लिया। प्रदेश की खट्टर सरकार पर बरसते हुए सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा सरकार युवा विरोधी है। रोजगार देने की बजाए युवाओं से रोजगार छीने जा रहे हैं। सुरजेवाला ने कहा कि चुनावों में हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वायदा भी भाजपा सरकार द्वारा हवा हवाई हो गया है जो आज हर साल मोदी सरकार द्वारा 1 लाख 35 हजार रोजगार देकर अपने युवा विरोधी चेहरे को बेनकाब किया है।

खट्टर सरकार द्वारा रोजगार देना तो दूर खट्टर सरकार ने 42 हजार युवाओं को नौकरी से निकालकर केवल 7,886 नौकरियां देकर इस प्रदेश के युवाओं के साथ दुर्व्यवहार किया है। आज हरियाणा में लगभग 1 लाख नौकरियों के पद खाली पड़े हैं और ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी सरकार के शासनकाल में 16 बार पेपर लीक हुआ हो ऐसी निक्कमी और बहरी सरकार ने आज किसानों और युवाओं के दिलों पर कुठाराघात करने का काम किया है। अभी गतदिवस पिहोवा में नगर पालिका के प्रधान और बीजेपी के एक नेता की वायरल ऑडियो पर अपनी प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि जब भाजपा के नेता नगर पालिका का प्रधान बनने के लिए 75 लाख की पेशकश करते हैं और भाजपा के नेता द्वारा उस ऑडियो में अपनी आवाज स्वीकार करना यह प्रमाणित करता है कि अगर इस तरह प्रधान बनने के लिए 75 लाख की पेशकश की जा रही है तो प्रदेश में युवाओं की नौकरियों में भी रिश्वतखोरी धड़ल्ले से चल रही है। हम मांग करते हैं कि रिश्वत लेने व देने वाले पर और उक्त चेयरमैन को चुनने वाले मुख्यमंत्री खट्टर की भुमिका की भी जांच होनी चाहिए।सुरजेवाला ने कहा आज ये बदलाव रैली की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि इस बदलाव रैली की हुंकार से दिल्ली की सरकार हिल जाए और हमारे अधिकारों की हुंकार से मनोहर लाल खट्टर की सरकार हिल जाए।

सुरजेवाला ने कहा कि आज पूरे हरियाण प्रांत और पूरे देश के अंदर पीठ और पेट एक करके मिट्टी से सोना पैदा करने वाला किसान व उसके साथ काम करने वाला मजदूर पीड़ित, व्यथित और आंदोलित है। उन्होंने कहा कि जब केन्द्र में भाजपा की सरकार नहीं बनी थी तो नरेन्द्र मोदी ने कुरूक्षेत्र में एक जलसे के दौरान किसानों को वायदा किया था कि भाजपा की सरकार आने पर उनको फसल लागत का 50 फीसदी मुनाफा दिया जाएगा। जब सरकार बनी तो मोदी व खट्टर सरकार ने इस वायदे को भूलाकर किसानों की पीठ पर खंजर घोपने का काम किया। उन्होंने कहा कि यहां तक ही नहीं केन्द्र सरकार ने 22 फरवरी 2015 को सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर कहा था कि वह किसानों को 50 फीसदी मुनाफा नहीं दे सकते। इससे बाजार भाव बिगड़ जाएगा। सुरजेवाला ने कहा कि मेरा सरकार से सवाल है कि जब देश के 12 उद्योगपतियों का 1 लाख 86 हजार करोड़ का कर्जा माफ कर दिया गया तो बाजार भाव क्यों नहीं बिगड़े। जब छोटा मोदी नीरव मोदी देश का 6 हजार करोड़ ले भागा, बैंक आफ बड़ौदा के 6400 करोड़ लेकर लोग भाग गए, तब देश का बाजार भाव क्यों नहीं बिगड़ा। पिछले 6 महीनों में 56 हजार करोड़ के घोटाले मोदी सरकार की नाक के नीचे हो गया है। उन्होंने कहा कि लेकिन अगर किसान को फसल लागत का मुनाफा देने की बात आती है तो ही बाजार भाव कैसे बिगड़ता है। सुरजेवाला ने कहा कि किसान की फसल खराब होती है तो केन्द्र व खट्टर सरकार कहती है कि हमने फसल बीमा योजना लागू की है। इसकी सच्चाई किसी को नहीं बताई।

इस सरकार ने खेती बाड़ी पर टैक्स लगाकर 22 हजार करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए और किसानों को बीमा के रूप में केवल मात्र 6 हजार 700 करोड़ रुपया दिया गया। 14 हजार करोड़ रुपये देश की 5 बीमा कंपनियों के खाते में चले गए, इनमें से कुछ कंपनियां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चहेती कंपनियां हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना का नाम प्रधानमंत्री फसल बीमा नहीं, बल्कि निजी कंपनी मुनाफा योजना होना चाहिए था। सुरजेवाला ने कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जब सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र पर टैक्स लगाया गया हो। ट्रैक्टर एव अन्य सभी उपकरणों पर 12 प्रतिशत का जीएसटी टैक्स लगाया गया जबकि टायर, ट्यूब और ट्रांसमिशन पार्ट्स पर 18 प्रतिशत का जीएसटी टैक्स लगाया गया। कीटनाशक दवाइयों पर 18 प्रतिशत, खाद पर 5 प्रतिशत तथा कोल्ड स्टोरेज पर 12 प्रतिशत का जीएसटी लगा दिया गया है। किसानो के आलू को सुरक्षित रखने वाले कोल्ड स्टोरेज पर भी 12 प्रतिशत टैक्स लगाकर किसानों की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया गया है। किसान पर टैक्स लगाकर 10 हजार करोड़ रुपए कमा रही है मोदी सरकार। किसानो के आलू के 25 पैसे के भाव पर जब किसान खट्टर सरकार के खिलाफ अपना विरोध प्रकट करते हैं तो उस विरोध का जवाब खट्टर सरकार द्वारा उन्हें पुलिस की लाठियों और गोलियों से दिया जाता है। आज खट्टर सरकार ने इरादाएकत्ल के मुकद्दमे के 47 किसानों को जेल में बंद कर रखा है और आज भाजपा सरकार की तानाशाहीनता के कारण प्रतिदिन 46 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। क्या इस तरह से ही देश व प्रदेश के किसानो का भला करेगी भाजपा सरकार? इसलिए बदलाव की जरूरत है। अपने संबोधन के आखिर में सुरजेवाला ने कहा कि यह बदलाव रैली सत्ता प्राप्ति, राजगद्दी प्राप्ति या चुनाव जीतने की मंशा से नहीं की गई बल्कि यहाँ की जनता के हकों को उन्हें सौंपने के लिए की गई है।

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