7:44 am - Thursday April 19, 2018

हरियाणा सरकार को नहीं मिल रहे दलित अफसर और कर्मचारी, हजारों पद खाली

रकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर भले ही विभिन्न जातियों में टकराव बढ़ता जा रहा है, लेकिन धरातल पर तस्वीर कुछ दूसरी ही है। पिछले 30 साल में हरियाणा की सरकारें कभी बैकलॉग पूरा नहीं कर पाईं। आज भी सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों, सार्वजनिक उपक्रमों और स्थानीय निकायों में अनुसूचित जातियों के करीब साढ़े चार हजार पदों पर पात्र कर्मचारी नहीं मिलने के कारण भर्तियां नहीं हो पा रहीं।

सरकारी महकमों में अनुसूचित जाति के 4392 पद खाली, कभी पूरा नहीं हुआ बैकलॉग

खासकर सरकार को पिछड़ी जातियों से अफसर ढूंढ़े नहीं मिल रहे। प्रदेश में अनुसूचित जाति के दो आइएएस अफसरों की कमी है तो अर्ध सरकारी विभागों और पीएसयू में प्रथम श्रेणी के 44 अफसरों की तलाश है। इसी तरह 75 सरकारी विभाग द्वितीय श्रेणी के 268 अफसरों के लिए जूझ रहे हैं। अर्ध सरकारी विभागों और सरकारी कंपनियों में अनुसूचित जातियों के 15 अफसर अलग से चाहिए।

सबसे बुरी स्थिति तृतीय श्रेणी के पदों की है जिसमें दलितों के 3068 पद खाली हैं। इस श्रेणी में सरकारी विभागों में 2717, अर्द्ध सरकारी विभागों, पीएसयू में 249 और स्थानीय निकायों में 102 अनुसूचित जाति के कर्मचारियों की कमी से कामकाज बुरी तरह प्रभावित है। वहीं, अनुसूचित जाति के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के कुल 995 पद खाली हैं। सरकारी विभागों में एससी और एसटी कोटे के 635, सरकारी कंपनियों में 327 और स्थानीय निकायों में 33 कर्मचारियों की लंबे समय से तलाश है।

16 साल थमी रही दलितों के रिक्त पदों पर भर्ती

बैकलॉग को भरने के लिए प्रदेश में वर्ष 1989 से कवायद चली आ रही है, लेकिन कभी सफलता नहीं मिल पाई। 7 जुलाई 1989 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने बैकलॉग के पदों पर विशेष भर्ती के लिए अभियान चलाया था। इसके बाद सत्ता में आई कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने बैकलॉग के पदों को भरने के लिए पुरजोर कोशिश की।

उन्होंने पहले 13 अप्रैल 1993, फिर 30 सितंबर 1994 और फिर 14 सितंबर 1995 को बैकलॉग पूरा करने के लिए विशेष भर्ती अभियान छेड़ा। इसके बाद हविपा की सरकार बनी। तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल ने 12 सितंबर 1997 और 25 सितंबर 1998 को दलित कोटे के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद इनेलो व कांग्र्रेस की सरकारें आईं, लेकिन कोटे के पदों को भरने पर कोई काम नहीं हुआ।

मनोहर सरकार में नियुक्त हुए 3552 दलित कर्मचारी

अक्टूबर 2014 में सत्ता में आई मनोहर सरकार ने कर्मचारी संगठनों के दबाव के चलते बैकलॉग को पूरा करने के लिए फिर से कवायद शुरू की है। 11 सितंबर 2015 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मुख्य सचिव को कोटे के रिक्त पदों पर तुरंत भर्ती के निर्देश दिए। तब से 3552 दलित कर्मचारियों और अफसरों को रिक्त पदों पर नियुक्त किया जा चुका। ग्रुप ए में 19 और ग्रुप बी में 517 एससी-एसटी अफसरों की नियुक्ति की गई है। इसी तरह ग्रुप सी में कोटे के तहत 3016 कर्मचारियों को भर्ती किया गया। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने नए सिरे से अनुसूचित जातियों के 266 पद विशेष भर्ती अभियान के तहत विज्ञापित किए हैं।

आरक्षित श्रेणी को मिलेगा हक : सीएम

” सरकारी नौकरियों में बैकलॉग को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार गंभीर है। हमने पिछले साढ़े तीन साल में साढ़े तीन हजार से अधिक रिक्त पदों पर पात्र अफसरों और कर्मचारियों की नियुक्तियां की हैं। कोटे के अन्य पदों को भी जल्द ही भरा जाएगा। हमारी सरकार ने पहली बार कांट्रेक्ट आधार पर की जा रही सभी प्रकार की भर्तियों में कोटा सिस्टम शुरू किया है ताकि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को उनका हक मिल सके।

                                                                                                   – मनोहर लाल, मुख्यमंत्री, हरियाणा।

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