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हरियाणा सरकार नौकरियों में फेयर सिलेक्शन की उड़ रही धज्जियां…

नौकरियों में फेयर सिलेक्शन की उड़ रही धज्जियां…
चाइल्ड वेलफ़ेयर काउंसिल में भाई-भतीजावाद का चल रहा खुला खेल…

खस्ता वित्तीय हालत के बावजूद की जा रही नियुक्तियां….  एक ही अधिकारी पर नियमों से खिलवाड़ करके अपने 35 रिश्तेदारों को कांउसिल में नौकरी पर रखने का आरोप…

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर अपनी सरकार में नौकरियों में फेयर सिलेक्शन के रोज दावे करते हैं। मगर उनकी नाक के नीचे चंडीगढ़ में ही चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल में अधिकारियों के रिश्तेदारों को नौकरी देने का खुला खेल खेला जा रहा है। आरोप है कि अपने रिश्तेदारों को नौकरियां देने के लिए हरियाणा स्टेट काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफ़ेयर में सभी नियमों को दरकिनार करते हुए मनमर्जी के सर्विस रूल बनाकर षडयंत्र रचा गया। अब एक बार फिर खास बात यह है कि सर्विस रूल्स बनने से पहले ही भर्तियों के विज्ञापन निकाल कर अपने लोगों को नौकरी देने का ग्राउंड तैयार किया गया है।

हम बात कर रहे हैं चंडीगढ़ के सेक्टर 16 डी के 650 नंबर मकान में स्थित हरियाणा स्टेट काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर के बारे में। इसकी कमान वैसे तो राज्यपाल हाथों में है। इसे प्रेजिडेंट राज्यपाल और वाइस-प्रेजिडेंट मुख्यमंत्री होते हैं।  इसी महकमे में अब नई भर्तियां निकाली गई हैं। काउंसिल ने एडवर्टाइजमेंट नंबर 29 /2017 में डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड वेल्फेयर ऑफिसर के 3 पदों, जिला कैडर के प्रोग्राम ऑफिसर के 3 पदों, हेडक्वार्टर में प्रोग्राम ऑफिसर के 1 पद के लिए विज्ञापन निकाले। इन विज्ञापनों को 1-11-2017 से एप्लीकेशन मांगी गई और एप्लीकेशन सबमिट करने के लिए 1-12- 2017 अंतिम तिथि तय की गई।

इन नियुक्तियों में धांधली की सूचना मिलने पर पंचकूला के आरटीआई एक्टिविस्ट हवा सिंह राठी ने सीएम विंडो पर 14 -11-2017 को शिकायत दर्ज कराई कि चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल में वित्तीय हालत बेहद खस्ता होने के बावजूद, अपने चहेतों को एडजस्ट करने के लिए यह नियुक्तियां निकाली गई हैं। राठी ने आरोप लगाया कि काउंसिल के आय के सभी स्त्रोत बंद हो गए हैं और उससे मिलने वाले फंडों की कमी के चलते काउंसिल ने 30 मार्च 2017 को ड्राफ्ट किए गए सर्विस रूल्स में डिस्ट्रिक्ट के प्रोग्राम ऑफिसर के पदों को खत्म करने का फैसला किया था। लेकिन इसके बाद नवंबर में निकाले गए विज्ञापनों में फिर से जिलों में प्रोग्राम ऑफिसर के 3 पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांग लिए गए।

राठी द्वारा दी गई शिकायत में कहा गया कि चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल में काम कर रहे अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों को भर्ती कराने के लिए ही यह नियुक्ति निकाली। सीएम ऑफिस ने यह शिकायत उसी समय राज्यपाल ऑफिस को भेजी। राज्यपाल ने शिकायत के बारे में चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल को 14-11-2017 को ही यह आदेश दिया गया कि मामले की गहराई से जांच करते हुए 12 दिसंबर 2017 तक एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा कराई जाए। खास बात यह है कि चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल ने राज्यपाल के आदेश को भी दरकिनार करते हुए तय तिथि तक इस मामले में कोई भी ना तो जांच की और ना ही कोई कार्रवाई की।

इस बारे में राज्यपाल ने मानद महासचिव को 6-12- 2017 को रिमाइंडर भेजते हुए 12 दिसंबर तक जांच कराने के आदेश भी दिए थे। मगर चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल ने जहां एक तरफ राज्यपाल के आदेशों को दरकिनार कर दिया, वही सीएम विंडो पर दर्ज की गई शिकायत का खौफ भी ना मानते हुए अपनी मर्जी से भर्तियां करने का काम शुरू कर दिया।

इस बारे में खास बात यह है कि राज्यपाल ने महिला एवं बाल विकास विभाग से शिकायत की जानकारी मांगी। इसपर महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक ने बताया कि चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल की वित्तीय हालत बहुत ही खराब है, क्योंकि उसके सभी स्त्रोतों से आय होनी बंद हो गई है। इसलिए प्रार्थी द्वारा की गई शिकायत सही प्रतीत होती है।

निदेशक ने कहा कि संस्था की वित्तीय हालत ठीक नहीं है तो जिला बाल कल्याण अधिकारी व प्रोग्राम ऑफिसर के पदों के लिए आवेदन मांगना किसी भी तरीके से सही नहीं है। उन्होंने राज्यपाल से इस मामले में गहराई से जांच करने की मांग भी की है।

।। क्या है पूरा खेल ?? ।।

हरियाणा स्टेट काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर में लंबे समय से अपने रिश्तेदारों को नौकरियां देने का खेल खेला जा रहा है। सालों बाद भी अभी तक काउंसिल में कोई भी सर्विस रूल नहीं बने हुए थे।

राज्यपाल के बार-बार कहने के बाद 30 मार्च 2017 को सर्विस रूल ड्राफ्ट किए गए। इन ड्राफ्ट सर्विस रूलों में चाइल्ड वेलफेयर अधिकारी की योग्यता किसी भी विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री मांगी गई जबकि प्रोग्राम ऑफिसर के पद के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री तय की गई।

ड्राफ्ट सर्विस रूल में जिला कैडर के प्रोग्राम ऑफिसर के पदों को खत्म करने का फैसला लिया गया। इसमें यह कहा गया कि पदोन्नति या रिटायरमेंट के साथ ही यह पद खुद खत्म हो जाएंगे और नई नियुक्तियां नहीं की जाएंगी। लेकिन काउंसिल के नौकरी माफिया ने अपने रिश्तेदारों को नौकरियां दिलाने के लिए ड्राफ्ट सर्विस रूल के साथ खिलवाड़ करते हुए 01-11-2017 को नियुक्तियों के लिए जिला कैडर में प्रोग्राम ऑफिसर के 3 पदों को शामिल किया गया। बड़ी बात यह है कि इन पदों के लिए जो योग्यताएं निर्धारित की गई वह ड्राफ्ट सर्विस रूल में कहीं नहीं थी।

।। मां पैदा होने से पहले ही बच्चे का हो गया जन्म !

इस मामले में सबसे हैरानी की बात यह है कि नियुक्ति के विज्ञापनों में जो क्वालिफिकेशन निर्धारित की गई, वह ड्राफ्ट सर्विस रूल में नहीं थी। मगर विज्ञापन निकालने की तिथि 1-11-2017 के ठीक डेढ़ महीने बाद 14-12- 2017 को फाइनल किए गए सर्विस रूल में वही क्वालिफ़िकेशन शामिल की गई। जब सर्विस रूल बने ही 14-12 -2017 को हैं तो उनको डेढ़ महीने पहले निकाली गई रिक्तियों में भला कैसे शामिल किया जा सकता है। साफ है कि अपने रिश्तेदारों को नौकरी देने के लिए चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल के नीति निर्धारकों ने नई योग्यताओं का निर्धारण किया।

।। इनको नियुक्त करने का रचा गया खेल ।।
सुत्रों के हवाले से ख़बर है कि इन लोगों को नियुक्ति मिलनी तय है-
नंबर 1 : सुभाष मेहरा (अभी हिसार में अकाउंटेंट के पद पर तैनात)
मुख्यालय में तैनात सीनियर चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर ओपी मेहरा के भाई।
नंबर 2: सिवानी सूद
मुख्यालय में अडाप्शन ऑफिसर के पद पर तैनात पूनम सूद की बेटी।( सिवानी सूद को नौकरी देने के लिए ही मुख्यालय में प्रोग्राम ऑफिसर की पोस्ट निकाली गई। इस पद पर हाई कोर्ट द्वारा स्टे लग जाने के कारण उनकी नियुक्ति पर सवालिया निशान लग गया है।)
नंबर 3 : ओपी मेहरा का रिश्तेदार।
नंबर 4 : मानद महासचिव संतोष अटरेजा की रिश्तेदार।
नंबर 5 : राजभवन के अधिकारी का रिश्तेदार।
नंबर 6 : राजभवन के अधिकारी का रिश्तेदार।
नंबर 7 : सिर्फ यही पोस्ट आम आवेदकों के लिए बची है।

जानने योग्य बात यह है कि काउंसिल ने 7 पदों के लिए आवेदन मांगे हैं। इनमें से 6 पदों को चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल से संबंधित लोगों के रिश्तेदारों को भरने के लिए यह नियुक्तियां निकाली गई।
ऐसा नहीं है कि काउंसिल में भर्तियों को लेकर धांधली पहली बार देखने को मिली है। इससे पहले की सरकारों में भी अधिकारी अपने रिश्तेदारों को नौकरी देने का काम करते आए हैं। नौकरियों में पूरी धांधली और मनमर्जी करने के लिए काउंसिल खुद ही नियुक्ति के विज्ञापन देती है, खुद ही इंटरव्यू करती है और खुद ही नियुक्तियों को फाइनल करती है ।

।। संतोष अटरेजा के कार्यकाल में पहले हुई भर्तियों की पोल खोल ।।
नंबर 1 : जगबीर
ओपी मेहरा का भतीजा
इसे सिक्योरिटी गार्ड कम ड्राइवर के पद पर नियुक्त किया गया।
नंबर 2: मीनु
मानद महासचिव संतोष अटरेजा की रिश्तेदार।
इसे क्लर्क पद पर नौकरी दी गई।
नंबर 3: दीक्षा
विभागीय अधिकारी विपिन की बेटी।
इसे क्लर्क के पद पर नियुक्त किया गया।

।। पहले से चल रहा भाई-भतीजावाद ।।
इन भर्तियों के मास्टरमाइंड ओपी मेहरा ने पूर्व कांग्रेस सरकार में मानद महासचिव इंदू दहिया से अपने भतीजे राजेश को ड्राइवर के पद पर लगवाया।  गौरतलब है कि फरवरी 2018 में संतोष अटरेजा का कार्यकाल खत्म होना है। संतोष अटरेजा के कार्यकाल के खत्म होने से ठीक पहले नई भर्ती की जा रही है।

खरी-खरी बात यह है कि इस मामले में राज्यपाल के आदेशों को अनदेखा व सीएम विंडो के खौफ को दरकिनार किया गया है। देखना ये है कि मनोहर लाल सरकार अपने वादे के अनुसार भर्तियों में पूरी पारदर्शिता को अमली जामा पहनाते हुए चाइल्ड वेलफेयर काउंसिल की रेवड़ियां बांटने की परंपरा को किस तरह से बंद करवाएंगे? क्या मुख्यालय में तैनात सीनियर चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर ओपी मेहरा पर अपने 35 रिश्तेदारों को महकमे में नौकरी दिलवाने के आरोपों की जांच होगी? क्या राज्यपाल दफ़्तर और मुख्यमंत्री दफ़्तर इस पूरे मामले की जांच करवाएंगे?

न्यूज़ स्रोत :- खरी-खरी न्यूज़

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