2:43 pm - Wednesday October 18, 2017

आरक्षण आंदोलन: जाट कल मनाएंगे काला दिवस, इंटरनेट 24 घंटे के लिए बैन किया गया

आरक्षण व अन्य मांगें मनवाने के लिए आंदोलन कर रहे जाट कर काला दिवस मनाएंगे। इसके चलते आज शाम से 24 घंटे के लिए इंटरनेट बैन कर दिया गया है। सोनीपत के जिला मजिस्ट्रेट एम के पांडुरंग ने आईपीसी की धारा 1973 की धारा 144 आदेश जारी कर इन्टरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी है।

यह आदेश आज शाम 5 बजे से 26 फरवरी शाम 5 बजे तक लागू रहेंगे। आदेशों में कहा गया है कि असमाजिक तत्व सोशल मीडिया का दुरूपयोग करके अफवाहें फैला सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला में कानून व्यवस्था बनाये रखने के उद्देश्य से इंटरनेट पर रोक लगाई गई है।

करनाल में भी धारा 144 लगा दी गई है। वहीं कल सभी जाट लोग काले कपड़े पहनकर और काले बिल्ले लगाकर आएंगे। महिला काली चुनरी ओढ़कर आएंगी। ये निर्देश अ​खिल भारतीय जाट संघर्ष समिति की ओर से दिए गए हैं।

यशपाल मलिक ने एक नई शर्त रखी

27 दिन से धरने पर बैठे जाटों के साथ बातचीत की राह में नया मोड़ आ गया है। यशपाल मलिक ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए एक नई शर्त रखी है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से प्रदेश में लगातार 27वें दिन धरने जारी रहे। समिति के कार्यकर्ता अब 26 फरवरी को काला दिवस मनाने की तैयारी में जुटे है।

वहीं इस बीच अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति और सरकार की ओर से गठित ढेसी कमेटी के बीच बातचीत की राह में शुक्रवार को नया मोड़ आ गया। गत 20 फरवरी को पानीपत में दूसरे दौर की वार्ता के बाद समिति ने सरकार को सात दिन का समय दिया था, लेकिन अब समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने साफ कह दिया है कि सरकार बार-बार वार्ता कर रही है, लेकिन वार्ता करने वाली कमेटी को समझौते के अधिकार नहीं दिए जाते।

बिना अधिकारों वाली कमेटी के साथ अब कोई वार्ता नहीं होगी। हालांकि वे तीसरी बार वार्ता को भी तैयार हैं, लेकिन इस बार वार्ता सीधे सरकार से होगी। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुक्रवार को दिल्ली बाईपास स्थित एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। मलिक ने कहा कि पिछले साल फरवरी में हुए आंदोलन के बाद सरकार और समिति के बीच समझौते हुए थे, लेकिन सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया।

इसी वजह से प्रदेश भर में फिर से धरने शुरू किए गए। अब बार-बार सरकार वार्ता कर रही है, लेकिन वार्ता के लिए जो कमेटी बनाई गई है, उन्हें कोई अधिकार ही नहीं दिए गए। यही कारण है कि वार्ता विफल हो रही है। सरकार मृतकों के परिवारों को नौकरी देकर झूठे मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करे तो धरनों पर लोगों की संख्या कम कर दी जाएगी। धरने तभी खत्म होंगे, जब मांग पूरी हो जाएंगी।

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