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देश में सबसे पिछड़ा है हरियाणा का मेवात जिला, नीति आयोग ने किया खुलासा

जहां हरियाणा राज्य सरकार जहां प्रदेश व प्रदेश के जिलों के विकास में अग्रसर होने का दावा करने में चूक नहीं आती। वहीं नीति आयोग ने एक सूची जारी की जिसमें राज्य सरकार के दावे खोखले नजर आते हैं। नीति आयोग ने जो सूची जारी की है उसमें विकास के नजरिये से देश के सबसे पिछड़े जिलों का उल्लेख किया गया है। हैरानी जनक तथ्य इस सूची में जो जिला पिछड़ेपन में सबसे प्रथम स्थान पर है, वो हरियाणा का है और साथ ही वह एनसीआर के निकट भी पड़ता है।

देश के पिछड़े जिलों में प्रथम स्थान पाकर इस जिले ने राज्य सरकार की विकास ने नाम पर बढ़ी हुई नाक काट दी है। देश का सबसे पिछड़ा जिला होने का खिताब पाने वाला जिला मेवात है। जी हां! नीति आयोग ने देश के पिछड़ेपन की 101 संभावना वाले जिलों में हरियाणा का मेवात ही सबसे प्रथम स्थान पर रखा है। इसके बाद तेलंगाना का आसिफाबाद, मध्य प्रदेश का सिंगरौली, नागालैंड का किफिरे और उत्तर प्रदेश का श्रावस्ती पांच सबसे पिछड़े जिलों में शामिल हैं।

नीति आयोग ने जिन 115 संभावना वाले जिलों की पहचान की है, उनमें से 101 के आंकड़े राज्य सरकारों से मिल गए हैं और इनकी पहली रैंकिंग बुधवार को राजधानी दिल्ली में जारी की गई। आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने यह रैंकिंग जारी करते हुए बताया कि रैंकिंग का उद्देश्य किसी जिले को नीचा और किसी अन्य को बेहतर बताना नहीं है। इसका उद्देश्य इन जिलों में आपसी प्रतिस्पद्र्धा पैदाकर विकास के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे राज्य सरकारों, स्थानीय सांसदों तथा जिलाधीशों को यह पता चल सकेगा कि किन जिलों में ज्यादा काम करने की जरूरत है।

इस आधार पर हुई पहचान
सीईओ कांत ने कहा कि हर जिले को 49 संकेतकों जैसे टीकाकरण, बीच में पढ़ाई छोडऩा, शिशु मृत्यु दर आदि पर अंक दिए गए हैं। हर जिले को यह पता होगा कि वे इन संकेतकों पर अपने ही राज्य तथा देश के सर्वश्रेष्ठ जिलों की तुलना में कहां ठहरते हैं और किन संकेतकों पर ज्यादा काम करने की आवश्यकता है।

हर महीने जारी होगी नई लिस्ट
आज से यह रैंकिंग ऑनलाइन उपलब्ध हो गई है तथा रियल टाइम डाटा के आधार पर हर महीने की पहली तारीख को नीति आयोग नई सूची जारी करेगा। अभी 101 जिलों की रैंकिंग उपलब्ध है। श्रीकांत ने बताया कि ओडिशा के 10, पश्चिम बंगाल के चार और केरल का एक जिला जल्द ही इस सूची में शामिल हो जाएगा। इन जिलों की पहचान हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि मई से इन जिलों की रैंकिंग उनके द्वारा की गई प्रगति के आधार पर की जाएगी। उन्होंने बताया कि आयोग एक प्राइमर बना रहा है, जिसके तहत हर जिले के लिए ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जिनमें वे आसानी से आगे बढ़ सकते हैं और अपनी ओवरऑल रैंकिंग में तेजी से सुधार कर सकते हैं।

पिछड़ेपन का कारण पैसों की कमी नहीं
सीईओ ने बताया कि इन जिलों के पिछड़ेपन का कारण पैसे की नहीं प्रशासन की कमी है। इन जिलों के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर 115 प्रभारी अधिकारी बनाए गए हैं जो अतिरिक्त सचिव या संयुक्त सचिव के स्तर के होंगे। साथ ही सचिवों की एक अधिकार प्राप्त समिति प्रगति की निगरानी करेगी जिसके अध्यक्ष नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे। राज्यों के स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।

जिलों की प्रगति के पैमाने में शिक्षा एवं पोषण के लिए 30 अंक, शिक्षा के लिए 30 अंक तथा कृषि एवं जल संसाधन के लिए 20 अंक दिए गए हैं। शेष 20 अंक वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और मूलभूत ढांचों के लिए हैं।

गृह मंत्रालय की देखरेख में होगा विकास कार्य
कुल 101 जिलों में 33 नक्सल प्रभावित हैं। साथ ही ओडिशा के सूची में शामिल होने वाले जिलों में भी दो नक्सल प्रभावित हैं। इनके विकास की देखरेख का काम गृह मंत्रालय करेगा। नीति आयोग को 25 जिलों और केंद्रीय मंत्रालयों को 43 जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। इन पिछड़े जिलों में सबसे अच्छा प्रदर्शन वाले पांच में आंध्र प्रदेश के विजयनगरम, छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव, महाराष्ट्र के उस्मानाबाद, आंध्र प्रदेश के कड़प्पा और तमिलनाडु के रामनाथपुरम को रखा गया है। श्रीकांत ने कहा कि इन जिलों को यह नहीं समझना चाहिए ये बेहतर कर रहे हैं, बल्कि ये अन्य पिछड़े जिलों से बेहतर हैं।

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