3:12 pm - Wednesday April 18, 2018

हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन घोटाला: डेढ़ महीने में 22 लोगों से नौकरी की डीलिंग, 20 से पूछताछ, 3 गवाह बने

हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमिशन (एचएसएससी) में नौकरी दिलाने के लिए पिछले डेढ़ माह के दौरान स्टेट के अलग-अलग हिस्सों में 22 लोगों से डीलिंग की गई। 20 से ज्यादा लोगों से पूछताछ करने के बाद इनमें से तीन लोग गवाही देने को तैयार हो गए। इन्होंने मंगलवार को पंचकूला कोर्ट में एफिडेविट के साथ तमाम सबूत देकर 164 के बयान दर्ज कराए। इन बयानों से पता चलता है कि नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को कैसे फंसाया जाता है और कैसे उनसे लिंक निकाला जाता है।

पंचकूला कोर्ट में एफिडेविट देकर बयान दर्ज करवाए

– एसआईटी सूत्रों का कहना है कि तीनों ही गवाहों ने आरोपी अनिल के खिलाफ बयान दिए हैं। अनिल इस पूरे नैक्सेस का सबसे अहम हिस्सा है। अनिल सीक्रेट ब्रांच में तैनात था। उसके पास गोपनीय रिकॉर्डभी उपलब्ध रहता था। – अपनी पहुंच का दुरुपयोग करके वह अन्य आरोपियों के साथ मिलकर ही इस पूरे नैक्सेस को चलाता था। नौकरी दिलाने की एवज में वसूली गई सबसे ज्यादा रकम उसके ही पास है। इसी कारण से पुलिस को उससे काफी रिकवरी करनी है। एसअाईटी जांच में एक-एक कदम बड़ी एहितयात से उठा रही है ताकि कोई भी पहलु छूट न जाए।

गवाहों ने एसआईटी को दिए सबूत

1. पत्नी के गहनों को गिरवी रखकर दिए थे दो लाख

– चंडीगढ़ के सेक्टर 49डी में रहने वाले गौतम सिंह (काल्पनिक नाम) ने बताया कि उनके भाई ने नौकरी के लिए कई बार पेपर दिए, लेकिन नंबर नहीं पड़ा। वो बहुत ही मायूस रहने लगा था। उसने इस बार हरियाणा में क्लर्क की भर्ती में आवेदन तो कर दिया, लेकिन डर था कि कहीं हर बार की तरह असफल न हो जाए। अपने एक जानकार से बात की, तो उसने अनिल के बारे में बताया।

– कॉन्टेक्ट करने पर अनिल ने रोल नंबर सहित बाकी डिटेल ली। बातचीत फरवरी में हुई थी। उस वक्त पेपर का रिजल्ट पता चल गया था, जिसमें नंबर सही थे। इसके बाद भी डर था, कि कहीं पोस्टिंग में अड़चन न आ जाए। – अनिल ने सारी जानकारी लेने के बाद कहा था कि काम हो जाएगा। 15 मार्च को रिजल्ट अाया, जिसमें वो सलेक्ट हो गया। इसके बाद ही अनिल ने बार बार कॉल करना शुरू कर दिया। वो 4 लाख रुपयों की डिमाडं कर रहा था। भाई जयवीर के पास रुपए नहीं थे। ऐसे में उन्होंने अपनी पत्नी के गहनों को गिरवी रखकर करीब दो लाख रुपए ब्याज पर लिए। आज तक वो ब्याज ही भर रहे हैं।

2. साढ़े 3 लाख में सौदा, 2 लाख दिए थे एडवांस

– गोहाना के रहने वाले इस गवाह के भतीजे ने ड्राइवर की पोस्ट के लिए पेपर दिया। सब कुछ क्लियर था, लेकिन इंटरव्यू होना बाकी थी। अनिल कुमार यहां कृष्ण का पड़ोसी है।

– नौकरी पर बात हुई तो अनिल कुमार ने कहा काम हो जाएगा, लेकिन अभी बात नहीं बनेगी। जब मौका आएगा, तो बुला लूंगा। इस पर अनिल ने 25 फरवरी को रुपए लेकर कृष्ण कुमार को बुलाया। बात साढ़े 3 लाख रुपए में तय हुई थी। कृष्ण जीरकपुर में आकर अनिल को दो लाख रुपए दे गया। अनिल बाकी के डेढ़ लाख रुपए लेने के लिए फोन कर परेशान करने लगा।

3. मेरिट कैंडिडेट से की 7 लाख में डील

– तीसरा मामला सिरसा का है। यहां अनिल की ओर से ही सारी डीलिंग की गई थी। सिरसा के रहने वाले व्यक्ति के परिवार में दो लोगों ने एसए और स्टाफ नर्स की पोस्ट के लिए पेपर दिया और वो मेरिट पर भी थे, लेकिन अभी इंटरव्यू होना बाकी था। अनिल ने भरोसा दिलाया कि वो इंटरव्यू क्लियर करा देगा। अनिल से साढ़े 7 लाख रुपए की डील की। रुपए लेने के लिए रोजाना ही कॉल आ रहे थे।

ठगी का ऐसे पता चला

– असल में हुआ यूं कि इन लोगों ने जो पेपर और इंटरव्यूदिए, उसके नंबरों को देखने के लिए स्टाफ सिलेक्शन कमिशन की साइट पर ऑप्शन होता है। इसमें एक कोड और की दी जाती है। इन्होंने जब वहां जांचा तो पता चला कि रुपए देने की डीलिंग से पहले और उसके बाद के नंबरों में कोई भी बदलाव ही नहीं हुआ। यानी ऐसे में बिना किसी भी काम के रुपए ले लिए गए।

– एसआईटी की ओर से कॉल आने के बाद ये लोग गवाह बनने को तैयार हो गए। पुलिस ने इन लोगों को आरोपी इसलिए भी नहीं बनाया, क्योंकि इन लोगों के कैंडिडेट्स के नंबरों में अनिल कुमार या अन्य किसी भी आरोपी ने कोई बदलाव नहीं किया, बल्कि धोखा देकर रुपयों को ठगा है। गवाह मिलने से केस मजबूत होगा।

पांच लाख रुपए बरामद, 7 आरोपी भेजे अम्बाला जेल

सभी आठ आरोपियों को मंगलवार को पंचकूला कोर्ट में पेश किया गया, जहां एसआईटी ने सात आरोपियों के रिमांड की डिमांड नहीं की। उन्हें न्यायिक हिरासत में अंबाला जेल भेज दिया गया। एक आरोपी अनिल कुमार को पूछताछ के लिए दो दिन के रिमांड पर लिया है। एसआईटी ने सभी आरोपियों से 4 लाख 90 हजार रुपए, 3 कंप्यूटर, मोबाइल्स की रिकॉर्डिंग, कुछ मोबाइल और डाक्यूमेंट्स बरामद किए हैं।

– सभी आरोपियों काे चार दिन के पुलिस रिमांड के बाद कोर्ट में पेश किया गया। जहां दोनों सरकारी पक्ष और बचाव पक्ष के वकीलों में बहस हुई। कोर्ट में रिमांड कॉपी को लेकर भी बचाव पक्ष के वकील समीर सेठी ने एप्लीकेशन दायर की, जिसमें कहा गया कि पुलिस की ओर से पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।

– बचाव पक्ष के वकील समीर सेठी ने कोर्ट में कहा कि पंचकूला पुलिस की ओर से एफआईआर में आरोपी सुभाष का मोबाइल नंबर गलत लिखा गया है। वो सुभाष का नंबर नहीं है, फिर किस रिकॉर्डिंग के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया।

– इस पर पलुिस ने जवाब दिया कि उसकी रिकॉर्डिंग पलुिस के पास है, लेकिन एफआईआर में नंबर गलत लिखा गया है। अनिल ने अपने बयान में बताया कि वो इस पूरे रैकटे में शामिल था। उसने जो भी रुपए लिए थे, उनमें से कुछ रुपए अपने जानकारों के पास रखे हुए हैं।

– इसमें झज्जर के गांव दुबलधन में रहने वाले मोनू के पास चार लाख और नीलोखेड़ी में अरविंद के पास डेढ़ लाख रुपए रखे हैं। 50 हजार रुपए उसने खर्चकर दिए हैं। पलुिस ने इसकी बरामदगी के लिए अनिल का दो दिन का रिमांड लिया है।

डेढ़ महीने में 22 लोगों से लाखों रुपए वसूले गए

– रैकेट में अनिल सबसे ज्यादा पब्लिक डीलिंग करता था। वही लोगों से ज्यादातर मोबाइल पर टच में रहता था। अनिल की रिकार्डिंग से सामने आया है कि वह अड़कर अपनी मर्जी से पेमेंट लेता था, जबकि बाकी आरोपी चुपचाप जो मिलता जेब में डाल लेते थे।

– पिछले डेढ़ महीने में 22 लोगों से लाखों रुपए वसूले गए, जिसमें एक कैंडीडेट चंडीगढ़ पुलिस के सब-इंस्पेक्टर का बेटा भी है।

– इन 22 लोगों से ढाई लाख से लेकर साढ़े चार लाख रुपए के हिसाब से पेमेंट ली गई।

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