10:26 pm - Monday June 18, 2018

खट्टर मंत्रियों का कहना है कि समय से पहले चुनाव न हों नहीं तो खड़ी हो जाएगी खटिया

खट्टर सरकार ने देख लिया आइना, अब समय से ही होंगे विधानसभा चुनाव?

देश के बड़े नेताओं को जमीनी हकीकत का अंदाजा कम रहता है क्यू कि जहां जाते हैं उनके लिए भीड़ इकट्ठी कर दी जाती है, वहाँ साफ सफाई और चूना वगैरा डाल दिया जाता है और नेताजी समझते हैं कि सब कुछ ठीक है लेकिन चुनावों में पता चलता है कि कुछ भी ठीक नहीं था। हरियाणा सरकार को शायद अब किसी ने आइना दिखा दिया है और सरकार को पता चल गया है कि प्रदेश में पार्टी की हालत खस्ता है और हरियाणा अब तक के सूत्रों की मानें तो थोड़ी नहीं बहुत खस्ता है जिस बात को हम अपने पाठकों को पहले भी समय समय पर बताते रहते हैं।

अब जानकारी मिल रही है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के लिए एक देश-एक चुनाव’ के फार्मूले के तहत प्रदेश में समय से पूर्व चुनाव करवाने के पक्ष को लेकर संशय की स्थिति बन गई है, क्योंकि बीती रात मंत्रीसमूह की एकाएक बुलाई गई बैठक में मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को स्पष्ट कर दिया है कि वह समय पूर्व चुनाव नहीं चाहते। हरियाणा में मौजूदा सरकार अपनी पूरी पारी खेले, उसके बाद ही चुनाव होने चाहिए। मुख्यमंत्री केंद्र की मोदी सरकार के इस फार्मूले एक देश एक चुनाव का समर्थन कर चुके है और इसी संदर्भ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आगामी 28 फरवरी को भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक भी बुलाई है। ताकि उनकी राय जानी जा सके। अब अपने ही मंत्रियों की राय मुख्यमंत्री की राय से मेल नहीं खाती तो ऐसे में अब शाह की बैठक के लिए एजैंडा तैयार करना एक नई चुनौती होगा।

हालांकि कल हुई मंत्रीसमूह की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर तथा परिवहन मंत्री कृष्ण पंवार मौजूद नहीं थे, लेकिन बैठक में मौजूद सभी मंत्रियों की एकमत से यही राय थी कि लोकसभा चुनाव चाहे कभी भी हों, हरियाणा विधानसभा चुनाव सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बाद ही होने चाहिए। वहीं अब पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला संगठन के लोगों से इस संदर्भ में राय लेने के लिए जल्द ही बैठक बुलाएंगे, ताकि शाह की बैठक में बराला हरियाणा का पक्ष रख सकें। इन सब बातों से पता चलता है कि प्रदेश के तमाम मंत्रियों को अपनी घटती ताकत का अंदाजा लग गया है और विधायकों की तो बात ही अलग है अब चुनाव हुए तो आधे विधायक जमानत भी शायद ही बचा सकें क्यू कि कोई विकास नहीं करवा पा रहा है तो किसी का अपने कार्यकर्ताओं से व्योहार सही नहीं है। किसी से जनता त्रस्त है तो किसी के भाई बंधू जनता की आँख की किरकिरी बन गए हैं।

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