5:07 pm - Saturday March 25, 2017

जाट आरक्षण मामले में नया मोड़, याचिकाकर्ता ने की हाईकोर्ट की बेंच बदलने की मांग

हरियाणा में जाटों सहित छह जातियों को दिए गए आरक्षण के मामले में नया मोड़ आ गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में अारक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कुछ याचिकाकर्ताओं ने बेंच बदलने की अपील की।

दोनो जजों के जटसिख होने की दलील देते हुए मामला अन्य बेंच को रेफर करने की अपील :- आरक्षण को चुनौती देने वाली यादव महासभा और मुरारी लाल गुप्ता ने बेंच के दोनों जजों के जटसिख होने की बात कहते हुए इस मामले को अन्य बेंच को रेफर करने की बात कही। इन दलीलों पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि मौखिक अपील पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसके लिए अर्जी दाखिल की जाए। अर्जी पर सुनवाई करने बाद ही उचित आदेश दिया जाएगा।

मामले की सुनवाई आरंभ होते ही यादव महासभा की ओर से एडवोकेट पीआर यादव ने कहा कि उनका केस किसी अन्य बेंच को रेफर किया जाए। यादव ने कहा कि इस खंडपीठ के दोनों जज जटसिख हैं और वे इस मामले को नहीं सुन सकते हैं क्योंकि जाटों के आरक्षण को चुनौती का मामला है।

जस्टिस एसएस सारौं और जस्टिस लीज़ा गिल की खंडपीठ ने इसपर टिप्पणी करते हुए कहा कि आरक्षण पर रोक लगाने वाली भी यही बेंच थी। अब जब इस मामले की सुनवाई पूरी होने वाली है और इतना समय दिया जा चुका है तो इस समय बेंच बदलने की मांग समझ के परे है।

बेंच ने कहा कि यदि ऐसा है तो क्यों न आरक्षण से रोक हटा कर इसे दूसरी बेंच को भेज दें। साथ ही यह भी कहा कि मौखिक रूप से की गई अपील पर निर्णय नहीं लिया जा सकता है और ऐसे में यदि आपत्ति है तो इसे अर्जी दाखिल कर बेंच के सामने रखा जाए। अर्जी पर कानून के अनुरूप सुनवाई और निर्णय लिया जाएगा।

हरियाणा सरकार ने इस अपील पर कहा कि पहले ही छह माह से आरक्षण पर रोक जारी है और अब इस प्रकार की अर्जी दाखिल करना सीधे तौर पर रोक को जारी रखने और मामले को लटकाने का प्रयास है। इस दौरान कुम्हार महासभा व अन्य याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें बेंच पर भरोसा है और वे दलीलें जारी रखना चाहते हैं। इस पर हाईकोर्ट ने दलीले जारी रखने की छूट दी।

सीनियर एडवोकेट वीके जिंदल ने बहस आरंभ करते हुए नेशनल ज्यूडिशियल कमिशन मामले का हवाला देते हुए कहा कि हरियाणा विधानसभा ने जो एक्ट पास किया है वह पूरी तरह से असंवैधानिक है। विधानसभा में एक्ट को लाने से पहले जो अनिवार्य प्रावधान थे उनका पालन नहीं किया गया और आंकड़ों का ध्यान रखे बिना आरक्षण का प्रावधान कर दिया गया। बेंच इस मामले को आयोग के पास नहीं भेज सकती है। याची पक्ष की दलीलें पूरी न होने पर हाईकोर्ट ने सुनवाई को 24 जनवरी तक के लिए टाल दिया।

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