6:11 am - Friday December 15, 2017

सरकारी नौकरी कोई लॉलीपॉप नहीं, इस शख्स की वजह से सरकार को लगी फटकार

पिता की मौत के बाद सरकार की 5 लाख की राशि को ठुकरा कर अनुकंपा के आधार पर नौकरी की मांग करने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। करनाल निवासी पवन कुमार की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नौकरी परिवार को वित्तीय सहायता के लिए है। पांच लाख ठुकराने से यह साफ है कि परिवार की वित्तीय हालत ठीक थी। ऐसे में केवल स्कीम है इसलिए याची को नौकरी देना कोर्ट की नजर में सही नहीं है।

आदेशों के अंतिम अंश में हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर दी जाने वाली नौकरियों के लिए नियमों में उपयुक्त संशोधनों का सुझाव दिया। कोर्ट ने कहा कि नीति ऐसी हो, जिससे केवल जरूरतमंदों को ही इसका लाभ मिले न कि स्टेटस चाहने वालों को। पवन कुमार ने याचिका में कहा था कि उनके पिता की सरकारी नौकरी में रहते हुए 2005 में मौत हो गई थी। हरियाणा सरकार की नीति के अनुसार यदि सरकारी नौकरी में रहते हुए किसी की मृत्यु होती है तो आश्रितों में से किसी को सरकारी नौकरी दी जाती है।

याची ने बताया कि इससे पहले डीसी के सामने आवेदन किया गया था, लेकिन उन्होंने दावे को खारिज कर दिया था। डीसी के फैसले का विरोध करते हुए कहा गया कि मृत्यु के समय याची के पिता की आयु 50 साल 9 माह थी। इस उम्र तक व्यक्ति अपनी परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभा लेता है। वैसे भी 2006 में हरियाणा सरकार ने नई नीति बनाई थी और उसके तहत अनुकंपा के आधार पर नौकरी के बदले 5 लाख रुपये देने का फैसला लिया था। याची ने कहा कि उसे सिर्फ नौकरी ही चाहिए।

सरकारी नौकरी कोई लॉलीपॉप नहीं

कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अनुकंपा आधार पर नौकरी किसी के स्टेटस को बढ़ाने के लिए नहीं है और न ही अनुकंपा का प्रावधान है, इसलिए अयोग्य को नियुक्ति नहीं दी जा सकती है। सरकारी नौकरी कोई लॉलीपॉप नहीं है, जो किसी युवा को रोने से चुप करवाने के लिए यूं ही पकड़ा दिया जाए।

पिता 30 साल नौकरी कर चुके थे फिर बेटे को क्यों :-  कोर्ट ने कहा कि इससे पहले 30 साल की सेवा पिता दे चुके थे और अगले 30 साल के लिए अब बेटे को सेवाएं दे देना कहां तक सही है। सरकारी नौकरी में वेतन का भुगतान आम लोगों के टैक्स में दिए गए पैसे से होता है। संविधान की धारा 16 के तहत नौकरी के लिए सभी को समान अवसर दिया जाना चाहिए। ऐसे में इस मामले में याची को अनुकंपा आधार पर नौकरी दिए जाने के आदेश जारी नहीं किए जा सकते हैं।

हालांकि, हाईकोर्ट ने याची को छूट दी कि यदि वह 5 लाख की सरकार की ओर से ऑफर राशि को पाना चाहता है तो अथॉरिटी को अप्रोच करे। हाईकोर्ट ने यह छूट तब दी, जब याची ने कहा कि उसने आर्थिक सहायता इसलिए नहीं ली थी, जिससे कहीं उसका सरकारी नौकरी के लिए दावा नामंजूर न हो जाए।

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