3:11 pm - Friday November 22, 7501

हरियाणा में ‘भविष्य’ के क्लर्को का ‘भविष्य’ अंधेरे में।

हरियाणा सरकार में 2007 में क्लर्क भर्ती की सूचना जारी हुई, जोकि 31 जनवरी 2012 को भर्ती पूरी हुई, मतलब एक क्लर्क भर्ती को 5 साल लग गए, ये तो भगवान का आशीर्वाद था उन क्लेर्को पर की 2009 में चुनाव हुए और सरकार नही बदली, अगर बदल जाती तो वो शायद 5 साल में भी पूरी नही होती, ऐसे ही दिसंबर 2013 में हरियाणा में क्लर्क भर्ती आयी, युवाओ को नोकरी की उम्मीद लगी, लेकिन सरकार बदल गयी, भर्ती कैंसिल हो गयी,नई सरकार ने आते ही भर्ती प्रक्रिया बदल दी, साक्षत्कार को हटा लिखित परीक्षा से नियुक्ति की बात कही, इससे बेरोजगार युवकों को उम्मीद हुई, गरीब परिवार को भी उम्मीद हुई, की पढ़ाई से नोकरी मिल जाएगी, 2 साल बाद 2015 में नई सरकार ने क्लर्क भर्ती निकाली, बीच मे कई बार रिक्तियां बढ़ी, अन्ततः नवंबर2016 व दिसंबर 2016 में क्लर्क भर्ती की लिखित परीक्षा हुई, अंतिम चरण में एक उम्मीदवार के पास एक चिट पकड़ी गई, जिससे पेपर आउट की संका को बल मिला, भर्ती बोर्ड ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित की ओर अपनी रिपोर्ट देने को कहा, टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पेपर आउट नही था, ये केवल परीक्षा में नकल का मामला है, जैसे अन्य परीक्षा में नकल की जाती है, परीक्षा के शुरू होने पर कहि से पेपर के प्रशन पता करके उसकी नकल तैयार करके देना, ये एक नकल का मामला है, पेपर आउट होने, परीक्षा के शुरू होने से पहले होता है, ओर ये परीक्षा केंद्र व ट्रेज़री के बीच होता है, जबकि इस पेपर में ऐसा कुछ नही हुआ। लेकिन जब रिजल्ट आने को हुआ तो किसी आदमी ने (जबकि अब ये बात सामने आ रही है कि उसने पेपर भी नही दिया, वो भर्ती में उम्मीदवार भी नही है)कोर्ट में केस कर दिया कि पेपर लीक था इसलिए इसको कैंसिल किया जाए और दोबारा पेपर लिया जाए, जबकि उसके पास कोई ठोस सबूत नहीं है, केवल अखबार की कटिंग के आधार पर उसने केस किया है, जब उसने केस किया तो न्यायालय ने उसे खूब डांट भी लगाई की, आप 9 महीने से कहा सोये हुए थे? ओर अखबार की कटिंग कोई ठोस सबूत नहीं है, लेकिन फिर भी भर्ती बोर्ड से न्यायालय ने जवाब मांगा, अगली सुनवाई पर बोर्ड ने जवाब नही दिया तो न्यायालय ने रिजल्ट जारी करने पर रोक लगा दी, उसके बाद 3 सुनवाई पर भी बोर्ड की तरफ से कोई जवाब नही दिया गया है, नही तो केस अब तक खत्म हो गया होता, या तो रिजल्ट जारी हो चुका होता, या पेपर दोबारा होने को होता, इसमें बोर्ड की मंसा पर शक होता है, या तो बोर्ड इस भर्ती को जल्दी पूरी नही करना चाहता, क्योंकि बोर्ड पर भी राजनीतिक प्रभाव है, सरकार चाहती है कि सभी भारतीयों को इलेक्शन वर्ष में ले जाये और वोट का लाभ ले, लेकिन सरकार को बेरोजगार युवकों का बर्बाद होता जीवन नही दिख रहा, जो इतने दिन से नोकरी की प्रतीक्षा कर रहे है, अन्यथा बोर्ड द्वारा पिछली3 सुनवाई पर जवाब क्यों नही दिया गया? जबकि हरियाणा के लगभग सभी विभागों में क्लेर्को कई भारी कमी है, काम पेंडिंग पड़े है, सरकारी योजनाओ को चुना लग रहा है, क्योंकि काम तो बाबूजी ही करते है! अब सरकार क्या सोचती है इस बारे में ये तो आने वाला समय ही बतायेगा, क्लेर्को के दिन आएंगे या सरकार उनको यूं ही दर दर भटकायेगी, क्योंकि 2013 से अब तक 4 साल तो हो गए है, अब 2018 या मई 2019 में इलेक्शन है, ओर अगर ये परीक्षा कैंसिल हो गयी, ओर आगे सरकार बदल गयी तो समझो 4 साल ओर भर्ती लटक गई, तब तक तो शायद उम्मीदवार भी तय सीमा से उम्र में आगे निकल जाए, ओर मुकाबला भी बढ़ेगा, ओर अब जो मुकाबले में है, हो सकता है आने वाले 5 साल में तो वो मुकाबले से बाहर ही हो जाये, बेरोजगार युवा क्या करेगा? दुर्भाग्यपूर्ण, भूख से व्याकुल, किसी गलत संगत में पड़कर, जुर्म की तरफ न चल पड़े।
साहब! तरसा तरसा के भोजन दिया तो क्या दिया।

अगर सरकार क्लर्क भर्ती को लेकर सकारात्मक है तो जल्दी से जवाब दाखिल कर रिजल्ट से रोक हटवाकर परीक्षा परिणाम जारी करवाये ओर युवाओं को नोकरी दे। अन्यथा युवाओं को नोकरी के सपने दिखा सत्ता में आई सरकार को ये युवा सत्ता को ही सपना न बना दे, क्योंकि जैसे सपने इन्होंने दिखाए, वेसे कोई और भी दिखा सकता है, ओर भूखे को आकर्षित करना कितना आसान है ये तो सरकार भी जानती होगी, इन्होंने भी यही किया था।

यह खबर आप हिन्दी रोजगार समाचारपत्र दैनिक एक्स्प्रेस वेबसाइट के द्वारा पढ़ रहे है।

कृप्या अगर आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आए तो ज्यादा से ज्यादा शेयर एवम् लाइक करे:-www.fb.com/dainikexpress

हम खबरें छिपाते नहीं छापते है।

Filed in: Jobs

No comments yet.

Leave a Reply

*

error: Content is protected !!