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पटवारियों की पीड़ा ।। VICTIM OF HARYANA GOVT

2015 में 529 पटवारियों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हुआ। 1 मई 2016 को पेपर हुआ। 2017 में इंटरव्यू हुए। चयनित उम्मीदवारों को 6-7 सितंबर को प्रोविजनल ज्वाइनिंग लेटर दे दिए गए। उस वक़्त वादा किया गया कि 10 दिन के भीतर उनकी ज्वाइनिंग भी हो जाएगी। अब कैलेण्डर के हिसाब से सौ दिन से ज़्यादा बीत चुके हैं, लेकिन सरकार के 10 दिन आजतक पूरे नहीं हुए।

इस सरकार की एक के बाद एक भर्ती लटकती जा रही हैं। कोई कोर्ट में चैलेंज है तो कोई HSSC की साज़िश में फंसी है। कोई भी भर्ती फिलहाल पूरी होती नज़र नहीं आ रही। ऐसे में तकरीबन-तकरीबन पूरी हो चुकी इस पटवारी भर्ती के लाभार्थियों का दिल भी बैठा जा रहा है। पिछले 4 महीने से ये लोग अपने भावी महकमे पंचकूला स्थित डीएलआर (डिपार्टमेंट ऑफ़ लैंड रिकॉर्ड) मुख्यालय के चक्कर काट रहे हैं। कभी अधिकारियों को गुहार लगाते हैं, कभी अपने महकमे के मंत्री कैप्टन अभिमन्यु से विनती करते हैं तो कभी सूबे के मुखिया से प्रार्थना करते हैं। अपने हक़ के लिए भी इन लोगों को यहां-वहां गिड़गिड़ाना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी बात- इन चयनित पटवारियों में क़रीब सौ कैंडिडेट्स ऐसे हैं जो ऑलरेडी सरकारी नौकरी कर रहे थे। लेकिन इन लोगों को प्रोविज़नल ज्वाइनिंग लेटर इस शर्त पर दिया गया कि वो पहले पुरानी नौकरी से त्यागपत्र दें। सभी ने सरकारी नौकरी छोड़कर पटवारी बनने का ज्वाइनिंग लेटर लिया था। लेकिन हालात ये हैं कि इनकी पुरानी नौकरी भी चली गई और इस नौकरी पर भी सरकारी लेटलतीफ़ी जारी है।

दैनिक एक्स्प्रेस न्यूज़ के खरे-खरे सवाल

1. आख़िर पटवारियों को ज्वाइन करवाकर ट्रेनिंग शुरू क्यों नहीं करवाई जा रही?
2. नवचयनीत पटवारियों के साथ आख़िर ये सरकारी टॉर्चर क्यों ?
3. क्या सरकार बाकी भर्तियों की तरह इस भर्ती को भी लटकाना चाहती है?
4. एक भर्ती को पूरा करने में 3-3 साल क्यों लगाए जा रहे हैं?
5. सूबे के मुखिया जानकारी होने के बावजूद ऐसे कामों को क्यों अटकाते हैं?

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