2:34 pm - Tuesday April 17, 2018

HSSC में भ्रष्टाचारः हरियाणा सचिवालय से भी जुड़े गिरोह के तार

हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एचएसएससी) में नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली करने वाले गिरोह के तार हरियाणा सचिवालय से भी जुड़ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों से पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह में सचिवालय के कुछ लोग शामिल हो सकते हैं, लेकिन आरोपी कर्मचारी उनसे मोबाइल पर बात नहीं करते थे, क्योंकि उन्होंने मोबाइल पर बात करने से मना किया हुआ था।

– इनका मिलना-जुलना आवास या ऑफिस में ही होता था। अब जांच टीम मामले की तहकीकात में जुट गई है। अब तक की जांच के आधार पर पंचकूला पुलिस की क्राइम ब्रांच की ओर से नोटिस तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें अभी 30 से ज्यादा लोगों को राडार पर लिया गया है।
– इन लोगों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं, फाइलों के आधार पर भी इन लोगों को नोटेड किया गया है। जल्द ही इन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। लेकिन इन्हें आरोपियों का रिमांड पूरा होने के बाद ही जांच में शामिल किया जाएगा।

रिमांड के दौरान आरोपी कर्मचारियों ने कबूला- सरकारी नौकरियों के नाम पर करते थे वसूली
– रिमांड के दौरान आरोपियों ने कबूला है कि वे नौकरी के नाम पर अभ्यर्थियों से रकम लेते थे। पूछताछ में यह भी जानकारी जुटाई गई है कि आरोपियों ने अब तक किस-किसको भर्ती कराया है। कितने रुपए लिए हैं और पूरा रिकॉर्ड कहां है। सूत्रों का कहना है कि अभी रिमांड पर और भी कई खुलासे हो सकते हैं। इसमें कई बड़े लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

जानिए आरोपियों ने क्या-क्या कबूला
– सूत्रों के अनुसार सभी आरोपियों ने काम को बांटा हुआ था, किसी का काम नए लोगों को पकड़ना था, तो कोई पेमेंट लेकर आता था तो वहीं कोई रिकार्ड मेंटेन करता था। इसके अलावा रोल नंबरों को रखने और उसके बाद उन्हीं रोल नंबरों पर काम करवाने के मामले में अलग आरोपी काम करता था।
– सभी ने माना कि वो ये काम करते थे, लेकिन कुछ टेक्निकल सवालों के जवाब नहीं दिए गए हैं, क्योंकि उसके बारे में सिर्फ दो ही लोग जानते हैं।
– एचएसएससी में असिस्टेंट डीलिंग करता था। इसे युवकों से मिलवाया भी जाता था, ताकि रुपए देने वालों को विश्वास हो जाए। बलवान शर्मा बाहर से आवेदकों के बारे में पता करता था।
– पुनीत इस केस की सबसे अहम कड़ी है, क्योंकि उसके पास सारा डाटा होता था। वह आईटी विंग में होने के नाते ही सारा डाटा देख लेता था, जब यहां रिकॉर्ड को तैयार किया जाता था, तो उनमें से एक पुनीत भी था।
– रोहतास को उस सारे डाटा के बारे में पता होता था, जो लीक ही नहीं हो सकता है, क्योंकि उसे डाटा को सिक्योर करने का काम भी आता था। उसे सारी आईडी के बारे में पता होता था। इसके चलते वो रिकॉर्ड को टेंपर्ड करने के साथ उसे लीक करने की पूरी प्लानिंग में शामिल होता था। उसने इन बातों को कबूला है।
– सुरेंद्र ने कबूला कि वो इस पूरी प्लानिंग में शामिल था। इसके पास भी कुछ रुपए पड़े हैं, लेकिन रोल नंबर से लेकर डॉक्यूमेंट्स के बारे में सुखविंदर व सुभाष चंद को ही पता होता था।
– सुभाष शर्मा जो यहां कॉन्फिडेंशियल विंग में था, उसने बताया कि यहां जो काम होता था, उसमें शामिल था, वहीं उसके पास अभी भी कुछ रोल नंबर हैं। ये वो रोलनंबर है, जिन्हें लेकर अभी रिजल्ट आउट होना है। जिसके बारे में पहले ही बात कैंडीडेट्स की गई है।
– कॉन्फिडेंशियल विंग से सुखविंदर को रिजल्ट से जुड़ी हर उस फाइल का पता था। किस रिजल्ट को कब, कौन चैक कर सकता है, कब कैसे फाइल को आउट करना है। किस फाइल को लेकर क्या कर सकते हैं। वहीं कौन सा समय है कि जब इसे आउट कर रुपए लिए जा सकते हैं। इसके चलते अभी भी कई रिजल्ट से जुड़ी और पहले की भर्तियों से जुड़ी फाइलें उसके पास मौजूद हैं। इन ऑफिस की कॉन्फिडेंशियल फाइलों को उसने अपने पास छुपाकर रखा है।

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