11:10 pm - Monday June 18, 2018

34 साल की नौकरी में 71 ट्रांसफर, 6 महीनों की सैलरी के बिना कल रिटायर होंगे IAS कासनी

34 साल की नौकरी में 71 तबादले, ये कहानी है हरियाणा के ईमानदार और तेज-तर्रार IAS प्रदीप कासनी की। कासनी 28 फरवरी (बुधवार) को रिटायर हो रहे हैं। चौकाने की बात ये है कि कासनी 6 महीने की सैलरी, भत्तों के बिना ही रिटायर होगे। कासनी लैंड यूज बोर्ड के जिस ओएसडी पद से सेवानिवृत्त होंगे, सरकार के रिकार्ड में उस पद का कोई अस्तित्व ही नहीं है। अपनी सर्विस की आखिरी पोस्टिंग में कासनी को इस पद पर रहते हुए सरकारी गाड़ी और प्यून तक नहीं मिले। सिस्टम से परेशान कासनी ने इस तबादले के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की शरण ली। इस मामले की सुनवाई उनके रिटायरमेंट के आठ दिन बाद 8 मार्च को होनी है। 1980 में बने थे एचसीएस…

– 1980 बैच के एचसीएस (हरियाणा सर्विस कमीशन) अधिकारी प्रदीप कासनी वर्ष 1997 में आईएएस बने थे। उन्होंने हरियाणा सरकार के साथ वर्ष 1984 में अपनी सेवाएं शुरू की थी।

– उनकी पत्नी नीलम प्रदीप कासनी हरियाणा के राज्यपाल की एडीसी रह चुकी हैं और पिछले साल ही रिटायर हुई हैं।

सबसे ज्यादा तबादले हुड्डा (कांग्रेस) सरकार में हुए

– प्रदीप कासनी के सबसे ज्यादा ट्रांसफर हुड्डा (कांग्रेस) सरकार में हुआ। खट्टर सरकार के साढ़े 3 साल के कार्यकाल में सितम्बर 2016 में एक महीने के अंदर 3 बार कासनी का ट्रांसफर किया गया।
– हालांकि अक्टूबर 2015 में खट्टर सरकार आने के बाद कासनी को अहम पदों पर तैनाती की उम्मीद थी लेकिन गुरुग्राम मंडल कमिश्नर की नियुक्ति के बाद यह उम्मीद धरी की धरी रह गई।

अब लड़ाई लड़ रहे हैं कासनी
– कासनी बीते छह महीने से अपनी सैलरी, गाड़ी और अॉफिस के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। कासनी का कहना है कि वे भले ही रिटायर हो रहे हैं लेकिन वे लड़ाई जारी रखेंगे।
– प्रदीप कासनी को जब बैठने के लिए दफ्तर और काम करने के लिए फाइलें और स्टाफ नहीं मिला तो उन्होंने बोर्ड के बारे में सरकार से पूछा।
– सरकार से जवाब नहीं मिलने पर कासनी ने आरटीआई लगाई, जिसके जवाब में सरकार ने माना कि लैंड यूज बोर्ड वर्ष 2008 से अस्तित्व में ही नहीं है।
– वर्ष 2007 में यह पर्यावरण विभाग के अधीन था। बाद में इसे कृषि विभाग के अधीन किया गया, लेकिन कृषि विभाग ने केंद्र सरकार को इस विभाग को बंद करने का प्रस्ताव भेजा, जो मंजूर हो चुका था।
– इसके बावजूद हरियाणा सरकार ने कासनी को इस बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर तैनात कर दिया।

सामाजिक आंदोलनों में रहें है सक्रिय

– प्रदीप कासनी मूल रूप से चरखी दादरी के रहने वाले हैं। उनके पिता धर्म सिंह किसान-मजदूर आंदोलन के नेता थे।
– इमरजेंसी से पहले भिवानी में रिवासा कांड हुआ था। उस कांड से बंसीलाल के प्रति प्रदेशभर में आक्रोश था। धर्म सिंह उस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे।
– वह अपने साप्ताहिक अखबार लोक हरियाणा में बंसीलाल और इंदिरा गांधी के खिलाफ खुलकर लिखते थे।
– किशोर प्रदीप भी अखबार निकालने में उनकी मदद करते थे और सामाजिक आंदोलन में सक्रिय थे। जनसभाओं की मुनादी का जिम्मा उनके पास था।

आईएएस खेमका और कासनी दोनों के हुए हैं सबसे ज्यादा ट्रांसफर
– आईएएस अशोक खेमका और प्रदीप कासनी में कई समानताएं हैं। खेमका भी लगभग 50 से ज्यादा बार ट्रांसफर हो चुके हैं। वहीं प्रदीप कासनी के 71 तबादले हुए।
– दोनों अधिकारियों को हरियाणा के ईमानदार और तेज-तर्रार अफसर का दर्जा हासिल है और दोनों अधिकारियों को प्रदेश सरकार की उपेक्षा के सामना करना पड़ा।

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