1:14 am - Sunday December 4, 2016

IIT में एडमिशन के लिए भी पास करना होगा एप्टीट्यूड टेस्ट

IIT में एडमिशन के लिए भी पास करना होगा एप्टीट्यूड टेस्टयूपीए सरकार ने तीन साल पहले आईआईटी समेत केंद्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में एडमिशन की प्रक्रिया बदली थी। सोच थी कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता खत्म करना। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब मोदी सरकार नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था में एप्टीट्यूड टेस्ट से चुने छात्र ही जॉइंट एंट्रेंस टेस्ट (जेईई) दे सकेंगे।
तर्क यह है कि कोई भी छात्र अपना एप्टीट्यूड किसी कोचिंग क्लास में विकसित नहीं कर सकता। आईआईटी बॉम्बे के पूर्व निदेशक प्रोफेसर अशोक मिश्रा की अध्यक्षता में बनी प्रबुद्ध जन समिति (सीईपी) ने 5 नवंबर को रिपोर्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंप दी है। इसमें एप्टीट्यूड टेस्ट कराने के लिए नेशनल टेस्टिंग सर्विस बनाने की सिफारिश की गई है। नई व्यवस्था 2017 से लागू होगी।
2016 में मौजूदा व्यवस्था से ही परीक्षा ली जाएगी। समिति के मुताबिक 2013 में लागू की गई जेईई (मेन्स) व जेईई (एडवांस) की दो स्तरीय प्रवेश परीक्षा में कई खामियां हैं। इसकी वजह से कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता कम होने के बजाय बढ़ गई है। मंत्रालय ने व्यापक विचार-विमर्श के लिए समिति की सिफारिशें सार्वजनिक करने का फैसला लिया है।
… लेकिन कोचिंग की दुकानें चलती रहेंगी : तीन साल पहले यूपीए सरकार ने जो व्यवस्था लागू की थी वह 12वीं बोर्ड के अंकों के आधार पर एडमिशन की थी। लेकिन नतीजा यह हुआ कि वेटेज और परसेंटाइल की जटिलता एडमिशन प्रक्रिया में शामिल हो गई। इससे कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता और बढ़ी। कई बच्चे तो ऐसे बोर्ड्स में जाकर पढ़े, जहां टॉप 20 परसेंटाइल का प्रतिशत कम रहता था। उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों से भी कोचिंग संस्थानों पर असर
पड़ने की गुंजाइश कम ही है।
अभी यह है व्यवस्था : – जेईई (मेन्स) में मेरिट के आधार पर डेढ़ लाख छात्रों को चुना जाता है। ये ही जेईई (एडवांस) दे पाते हैं।
– जेईई (मेन्स), 12वीं के अंकों को 60:40 के अनुपात में वेटेज दिया जाता है। इससे एडमिशन होता है।
– जेईई (एडवांस) में मेरिट के आधार पर आईआईटी में एडमिशन दिया जाता है। इसमें भी बोर्ड में 75% अंक या बोर्ड के टॉप 20 परसेंटाइल में जगह बनाना अनिवार्य है।
– 2016 में मौजदा व्यवस्था था ही लाग होगी। लेकिन जेईई (एडवांस) के लिए डेढ़ लाख के बजाय दो लाख छात्रों को शामिल किया जाएगा।
यह है प्रस्तावित व्यवस्था : -2016 की शुरुआत में नेशनल टेस्टिंग सर्विस (एनटीएस) बनाया जाएगा। 2017 से साल में दो या ज्यादा बार ऑनलाइन एप्टीट्यूड टेस्ट लिया जाएगा।
– एप्टीट्यूड टेस्ट में साइंटिफिक एप्टीट्यूड और इनोवेटिव थिंकिंग से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। इसमें से चयनित चार लाख छात्र ही जेईई दे सकेंगे। मेन्स और एडवांस के बजाय एक ही एंट्रेंस टेस्ट होगा।
– जेईई में ही टॉप 40 हजार छात्रों को कॉमन काउंसिलिंग के जरिए आईआईटी और एनआईटी में दाखिले का मौका दिया जाएगा।
यह आएगा बदलाव : – एप्टीट्यूड टेस्ट से रटे-रटाए जवाब देने वाले नहीं बल्कि बेहतर समझ रखने वाले छात्र ही शीर्ष प्रौद्योगिकी संस्थानों में एडमिशन ले पाएंगे।
– नई व्यवस्था से न वेटेज निकालने का झंझट रहेगा और न ही बोर्ड से टॉप 20 परसेंटाइल आंकड़ों का इंतजार करना पड़ेगा।
खत्म होगा 12वीं के अंकों का वेटेज : एनआईटी, ट्रिपलआईटी और जीएफटीआई में दाखिले के लिए भी 12वीं के अंकों का वेटेज खत्म हो जाएगा। एनआईटी काउंसिल ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को सिफारिश की है कि जेईई (मेन्स) -2016 से 12वीं के वेटेज के नियम को हटाया जाए। यानी इस बार राज्यों के बोर्ड की ओर से अंकों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और एडमिशन प्रक्रिया जल्दी निपटाई जा सकेगी।
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