1:57 pm - Monday December 5, 2016

Important Tips to Prepare for 10th and 12th board exams in hindi

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पूर्व में हुए पेपर किन्हीं कारणों से यदि खराब हो गए हैं तो भी संभावनाएं वहीं पर खत्म नहीं हो जातीं। सुअवसर अभी भी आपके सामने है। जरूरत है तो हौसले से भरा कदम बढ़ाने की।

सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। छात्र अच्छे-बुरे प्रश्न पत्र की उधेड़बुन में लीन होंगे। जाहिर सी बात है कि किसी का पेपर अच्छा हो रहा होगा तो किसी का खराब। जिन छात्रों ने अच्छा किया होगा, उनके मन में खुशी का संचार हो रहा होगा। इसके विपरीत, जिनके प्रश्न गलत हुए अथवा छूट गए होंगे, वे खुद को मन ही मन कोस रहे होंगे। इस स्थिति में जो शांत रहते हुए बेहतर प्रदर्शन करते हैं, उन्हीं को सफलता मिलती है।

छात्र अपनी लय बरकरार रखें:- बेहतर यही होगा कि अतीत को जल्दी से जल्दी भुला कर आगे के प्रश्नपत्रों के बारे में सोचें। जो शुरुआती गलतियां हुई हैं, उन्हें दोबारा न दोहराने का संकल्प लेते हुए विषय के मुताबिक तैयारी करते रहें।

आलोचनाओं को सहज लें:- कुछ लोग ऐसे भी मिलेंगे, जो आपकी शुरुआती असफलता पर आपको हाशिए पर खड़ा करने की पूरी कोशिश करेंगे। ऐसे लोग आपके आसपास कहीं भी हो सकते हैं। शुरुआती दिक्कत आने पर कई बार पेरेंट्स भी अपना आपा खो देते हैं। न चाहते हुए भी इसका आपके ऊपर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में मानसिक दबाव भी बन जाता है। इससे विचलित हुए बिना अपनी कोशिशें जारी रखें। किसी के कहे पर कभी न जाएं।

आलोचनाएं यदि आपके हित में हैं तो उन्हें सकारात्मक रूप में स्वीकार करें, परन्तु उन्हें लेकर मन में तनाव कभी न पालें, क्योंकि पूरी आशंका है कि इससे आगे की चीजें भी बिखर जाएंगी।

न डिगने पाए आपका हौसला:- कभी-कभी हौसले के दम पर भी ऐसी चीजें हासिल हो जाती हैं, जिनकी आपने कभी कल्पना भी न की होगी। पुरानी गलतियां आपका कुछ न कुछ नुकसान तो करेंगी ही, पर आपके अंदर जज्बा कायम है तो काफी कुछ सुधारा जा सकता है। बस, आप अपना हौसला न खोएं। हौसले के अभाव में कभी भी अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पाएंगे। शुरू के एक या दो पेपर खराब भी हो गए तो इससे बात खत्म नहीं हो जाती। आप दोबारा वापसी कर सकते हैं। ऐसा न हो कि आगे के पेपर भी खराब जाएं। इसके अलावा अब तो एंट्रेंस का जमाना है। मेडिकल व इंजीनियरिंग में हर जगह प्रवेश परीक्षा के बूते एडमिशन मिल रहा है।

सावधानियों का रखें ख्याल:- इस नाजुक समय में जब आपको दोबारा वापसी करनी है तो कई तरह की सावधानियों का भी आपको ख्याल रखना होगा। अपेक्षानुरूप जवाब न दे पाने या पेपर खराब होने पर दबाव छात्रों के सिर चढ़कर बोलता है। ऐसे में छात्रों को बाधा उत्पन्न करने वाले हर तत्वों जैसे मोबाइल फोन, दूसरों द्वारा किए गए कमेंट्स, सामग्री को लेकर उहापोह आदि से बचना होगा।

कई बार छात्र इस स्थिति में इस कदर व्यग्र हो जाते हैं कि वे घर वालों से बात तक करना छोड़ देते हैं। सुबह-शाम जो टहलने जाते थे, उसे बंद कर खुद को एक कमरे में कैद कर लेते हैं। ऐसा करके वे अपनी परेशानी को और अधिक बढ़ा रहे होते हैं। टहलना व दिमाग रिफ्रेश करने के लिए कुछ देर तक टीवी देख लेना गलत नहीं है, बल्कि उसके वशीभूत हो जाना गलत है।

बहुत ज्यादा बदलाव से बचें:- ऐसी स्थिति में छात्रों को खुद से यह कमिटमेंट करना होगा कि जितना हुआ, वही काफी है, आगे और नहीं खोना है। इस संकल्प को लेने के अलावा उसका ईमानदारीपूर्वक पालन भी करना है। उनको अपनी रणनीति में पेपरों के बीच का गैप देख कर बदलाव लाने की जरूरत होती है। हालांकि बहुत ज्यादा बदलाव भी ठीक नहीं है, क्योंकि इससे छात्र अपनी लीक से अलग हट कर चलने लगेगा। रिवीजन के दौरान लगता है कि कुछ जरूरी प्वाइंट्स छूट रहे हैं तो उन्हें एक जगह नोट कर लें। जब भी समय मिले, उन्हें एक नजर देख लें। आपकी स्ट्रेटिजी यदि चार घंटे पढ़ने की है तो उसे बढ़ा कर आप पांच या छह घंटे तक कर सकते हैं।

जो हुआ उस पर ज्यादा न सोचें:- सिर्फ एक-दो पेपरों पर छात्र की पूरी कुंडली नहीं लिखी जा सकती। जिन छात्रों के पेपर खराब हुए हैं, उन्हें खुद पर संयम रखने की जरूरत है। अभी तक जो भी पेपर हुए हैं, वे बहुत ही सिस्टेमैटिक थे। आगे भी छात्रों को कोई दिक्कत नहीं आएगी, इसलिए छात्रों को बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। पूरा सिलेबस एनसीईआरटी बेस्ड है।

मैथ्स के पेपर में सब कुछ वर्बल नहीं होता, बल्कि उसकी तैयारी लिख कर की जाती है। अभी शुरुआत है, उनके पास पूरा समय बचा है। टीचर्स के टच में रहें और पूरी नींद लें। पेपर से पहले रात भर जगने का गलत नतीजा यह होगा कि अगले दिन पेपर में आपको नींद आएगी या आपका दिमाग फ्रेश नहीं रहेगा। परीक्षा खत्म होते समय जो पांच-दस मिनट शेष बच रहे हैं, इस समय को छात्र अपनी आंसर शीट के रिवीजन में लगाएं। हो सकता है कि कुछ गलतियां पकड़ में आ जाएं।

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