10:59 pm - Wednesday February 22, 2017

धरने की परमिशन नहीं मिली तो ये जाट नेता बोले-जूते मारो हमें मजा आएगा

अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति को प्रस्तावित धरने के लिए पंचायत और ग्रामीणों ने जमीन नहीं दी। इस पर प्रशासन समिति को तीन विकल्पों के साथ जाटल, मतलौडा और भापरा स्टेडियम में धरना देने की अनुमति देने को तैयार था, लेकिन समिति उग्राखेड़ी पर ही अड़ी रही। आखिर बिना अनुमति चौपाल में धरना शुरू हो गया। जाट नेता बोले-जूते मारो, हमें जूते खाकर मजा आएगा…

  • रविवार को यहां समिति के पदाधिकारी प्रताप दहिया की अगुवाई में उग्राखेड़ी की चौपाल में बिना प्रशासनिक अनुमति के ही धरनेपर बैठ गए। इससे पहले काफी बहस भी हुई।
  • इस दौरान चौपाल में धरना देने पहुंचे जाट पानीपत में प्रदर्शन की अगुवाई करने पहुंचे जाट नेता प्रताप दहिया ने पंचायत के सामने अपने जूते उठाकर कह डाला कि ये लो हमें जूते मारो, हमें जूते खाकर मजा आएगा। आधा गांव हमारे साथ है, धरना देंगे तो यहीं पर।
  • एसडीएम विवेक चौधरी और डीएसपी हेडक्वार्टर जगदीप दूहन ने कहा कि समिति ने उग्राखेड़ी के स्टेडियम में स्थान प्रस्तावित किया था। वहां की पंचायत और ग्रामीणों से बात की तो पंचायत ने लिखित में प्रस्ताव दिया कि हमारे गांव में धरने की मंजूरी नहीं दी जाए। इससे हमारे गांव का माहौल खराब हो सकता है।
  • एसडीएम ने कहा कि इस पर समिति के सदस्यों ने काला आम्ब रोड पर ग्रामीण ओम कुमार की जमीन प्रस्तावित की, जिसमें उसका भी सहमति पत्र था, लेकिन कुछ समय बाद ही जमीन के मालिक ने प्रशासन को पत्र भेजा कि वह धरने के लिए जगह नहीं देना चाहता। इसको देखते हुए प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी है।
  • एसडीएम के मुताबिक प्रशासन ने समिति से कहा था कि उग्राखेड़ी ही क्या कहीं से भी धरने की अनुमति लेकर आएं, वह मंजूरी देने को तैयार हैं, लेकिन किसी ने अनुमति नहीं दी। समिति को जाटल, मतलौडा और भापरा स्टेडियम के रूप में तीन विकल्प दिए गए, लेकिन ये लोग उग्राखेड़ी पर ही अड़े हुए हैं।
  • आखिर इसी विरोध के बीच धरना शुरू हो गया और फिर पंचायत के लोग किनारा करते दिखाई दिए और सूचना पाकर प्रशासनिक अधिकारी गांव के बाहर पहुंच गए। खबर लिखे जाने तक अधिकारी धरनास्थल पर नहीं पहुंचे थे।
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