5:11 pm - Saturday March 25, 2017

जाट आरक्षण केस: बेंच के समर्थन में आई सरकार, आज फिर सुनवाई

हरियाणा सरकार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जाट आरक्षण केस की सुनवाई कर रही बेंच के समर्थन में उतर आई है। इससे पूर्व याची ने दोनों जजों के जाट सिख होने की दलील देते हुए बेंच को केस से हटने की अपील के तहत अर्जी दी थी।

हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि अर्जी में ऐसे कोई गंभीर आरोप नहीं हैं, जिसके चलते बेंच को केस से पीछे हटना पड़े। समय की कमी के चलते हाईकोर्ट ने सुनवाई बुधवार को जारी रखने का निर्णय लिया है। साथ ही जाटों सहित छह जातियों को पिछड़ा वर्ग के तहत दिए गए आरक्षण के लाभ पर रोक को भी हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है।

मंगलवार को सुनवाई शुरू होते ही याची पक्ष की ओर से एडवोकेट पीआर यादव ने बहस आरंभ की। यादव ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि जिस प्रकार जाट आरक्षण मामले की स्थिति बनी है, उसे देखते हुए बेंच को केस की सुनवाई से पीछे हट जाना चाहिए। दोनों जज जाट सिख हैं। ऐसे में कहीं न कहीं जाट समुदाय से इमोशनल अटैचमेंट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। याची पक्ष द्वारा दलीलें समाप्त करने के बाद हरियाणा सरकार की ओर से मामले में अपना पक्ष रखा गया।

‘दोनों जज जट सिख, मामले को दूसरी बेंच को करें रेफर’

सरकार ने कहा कि बेंच को केस से पीछे हटने के लिए अपील वाली यह अर्जी दुर्भाग्यपूर्ण है। यह न केवल गलत है, बल्कि संविधान को चुनौती देने की तरह है। यह इस प्रकार का पहला मामला है, जहां जाति के आधार पर बेंच को किसी केस से पीछे हटने की अपील की गई है।

ऐसे में जज को किसी जाति विशेष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। पद की शपथ लेते समय भी इस बात को कहा जाता है कि वे इन दबाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष फैसला दें। इस तरह तो एससी एसटी एक्ट के मामलों में भी यह मांग की जाएगी कि जाति विशेष से जुड़े जज इन मामलों की सुनवाई न करें।

ऐसे में मामले पर जल्द सुनवाई पूरी कर कोर्ट इस तरफ या उस तरफ अपना फैसला दे। यह भी कहा कि अर्जी में कहीं पर भी गंभीर आरोप नहीं लगाए गए हैं, जिसके चलते बेंच को सुनवाई से पीछे नहीं हटना चाहिए।

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