8:51 am - Friday May 25, 2018

बॉक्सर मनोज बोले, पहले अपनी परफार्मेंस देखे खट्टर सरकार, फिर खिलाडिय़ों की बात करे

आस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए बॉक्सिंग में कांस्य पदक जीतने वाले बॉक्सर मनोज कुमार हरियाणा सरकार से नाराज हैं। उन्‍होंने नई खेल नीति को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने भाजपा सरकार पर शब्दों के पंच जड़े हैं। उन्‍होंने कहा कि खिला‍डियाें की बात करने से पहले सरकार अपने परफोर्मेंस पर ध्‍यान दें। मनोज ने राज्‍य सरकार द्वारा पदक विजेता खिलाडिय़ों को नौकरी के लिए टेस्ट लेने की घोषणा पर भी सवाल उठाए।

सरकार से आज तक नहीं मिला कोई सम्मान और ना ही उम्मीद

उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई आइपीएस अधिकारी अब टेस्ट पास कर सकता है। क्‍या एमएलए या मंत्री बनने से पहले वह कोई टेस्ट लिया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार खिलाडिय़ों को बेवकूफ समझ रही है। आस्ट्रेलिया से लौटने के बाद मनोज कुमार ने जागरण से खास बातचीत की।

प्रदेश सरकार की खेल नीति के बारे में पूछे जाने पर मनोज ने कहा कि पूर्व की सरकार में खिलाडिय़ों को गाड़ी, एलईडी, वीडियो कैमरा जैसी सुविधाएं देकर उनका रूतबा बढ़ाया जाता था, लेकिन अब उन्हें गिराने का काम किया जा रहा है। नौकरी किसी को दी नहीं और शर्तें पहले ही लगा दी।

उन्‍होंने कहा कि रेलवे से मिलने वाली ईनामी राशि को लेकर की जा रही बात भी गले नहीं उतर रही। एक खिलाड़ी देश को अपनी पूरी जिंदगी देता है। हर कोई ओलंपियन नहीं हो सकता। 71 देशों से मुकाबले में मेडल लेकर आना सबसे बस की बात नहीं। ऐसे इवेंट चार साल में आते हैं। सरकार भी पांच साल में बनती है। सरकार पहले अपनी परफार्मेंस भी देख ले।

यह पूछे जाने पर कि इस बार सरकार से क्या उम्मीद है, मनोज ने कहा कि आज तक उन्हें सरकार से कुछ नहीं मिला और ना ही आगे कुछ उम्मीद है। वह अपना कर्म कर रहे हैं जो होगा ठीक ही होगा। उनकी सोच सकारात्मक है कोई सम्मान देगा तो ठीक नहीं देगा तो भी ठीक। उनके कोच राजेश कुमार ने ओलंपिक में गोल्ड का टारगेट दिया है, जिसे वह पूरा करके ही रहेंगे।

यह पूछे जाने पर कि राष्‍ट्रमंडल खेलों में पदक जीतकर लौटे हैं तो क्या खेल मंत्री का फोन आया, मनोज कुमार ने कहा, हां, मेरे पास खेल मंत्री अनिल विज का फोन आया था और उन्होंने बधाई दी। उनकी आंख में कुछ दिक्कत थी तो वह कार्यक्रम में नहीं आ पाए। उन्होंने कहा है कि बाद में वह मेरे घर जरूर आएंगे।

दूसरे विभागों और राज्‍य से मिलने वाले ईनामी रकम की राज्‍य सरकार से मिलने वाली धनराशि में कटौती करने कि बारे में पूछे जाने पर उन्‍होंने कहा कि खिलाडिय़ों की धनराशि में कटौती करने से खिलाडिय़ों का हौसला कम होगा। सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए। पहले की सरकारों ने कभी कटौती नहीं की। उनकी सरकार से मांग है कि विजेता धनराशि को घटाना नहीं बल्कि बढ़ाना चाहिए। खिलाड़ी पूरे देश का गौरव होता है।

यह पूछे जाने पर कि जिला स्तर पर खिलाडिय़ों के लिए क्या सुविधा होनी चाहिए, मनोज ने कहा कि जिले में अलग से बॉक्सिंग हॉल होना चाहिए ताकि उभरते खिलाड़ी ठीक से तैयारी कर सकें। उसी हॉल में इंटरनेशनल लेवल की सुविधाएं होनी चाहिए। बेसिक लेवल पर सुविधाएं मिलेंगी तो ही अच्छे खिलाड़ी निकल कर सामने आएंगे। जिला स्तर पर अच्छे कोच नियुक्त करने चाहिए।

यह पूछे जाने पर कि इस बार कॉमनवेल्थ में आखिरी मुकाबले के दौरान क्या अनुभव रहा, उन्‍होंने कहा कि

मैं कभी हार जीत के बारे में नहीं सोचता। मैच के दौरान अपना बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करता हूं। अगर प्रदर्शन अच्छा नहीं होता है तो मन में आता है कि कहीं न कहीं कोई कमी रही है। अगली बार इस कमी को नहीं होने देना है। अंतिम मैच में पूरा जोर लगाया और मेडल उनके नाम रहा। कोच ने भी उनकी तारीफ की।

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