8:21 pm - Monday December 11, 2017

अब मंत्री एक माह तक कर सकेंगे कर्मचारियों के तबादले

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में मंत्रियों को अपने सम्बंधित विभागों के कर्मचारियों के तबादले एक माह तक करने के लिए अधिकृत कर दिया गया। बैठक में लिए गए फैसले के पश्चात देर शाम मंत्रियों को अपने विभागों से संबंधित तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले करने का अधिकार प्रदान करने की अधिसूचना जारी कर दी गई। शिक्षा विभाग के टीचिंग स्टाफ को छोड़कर मंत्री अपने विभागों के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले 30 अप्रैल तक कर सकेंगे। वहीं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने बैठक के बाद बताया कि सभी मंत्री राज्य की अलग-अलग मंडियों का दौरा कर गेहूं खरीद के प्रबंधों की समीक्षा करेंगे तथा सुनिश्चित करेंगे कि गेहूं का उठान व भरान समय पर हो एवं किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

18 अप्रैल को होगी मंत्रिमंडल की आगामी बैठक :- उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल की आगामी बैठक 18 अप्रैल को बुलाने का निर्णय भी बैठक में लिया गया। जी.एस.टी. पारित करने के लिए राज्य विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र भी बुलाया जाएगा, जिसका निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे। उन्होंने बताया कि बैठक में बी.पी.एल. सर्वे के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ओ.पी. धनखड़ की अध्यक्षता में मंत्री समूह की उपसमिति गठित करने का निर्णय भी लिया गया। कमेटी में वह स्वयं व मुख्य संसदीय सचिव डा. कमल गुप्ता शामिल होंगे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रधान सचिव अनिल कुमार कमेटी के सदस्य सचिव होंगे।

उन्होंने बताया कि गलत तरीके से विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पैंशनों का लाभ ले चुके 60 वर्ष से कम आयु के लोगों से पिछली सरकार ने 12 प्रतिशत ब्याज दर के साथ राशि वसूली करने का निर्णय लिया था परंतु मुख्यमंत्री ने दरियादिली दिखाते हुए 60 साल की उम्र पार कर चुके लोगों की पुन: पैंशन लगाने की घोषणा की है। गलत ढंग से कम आयु में ली गई पैंशन राशि की वसूली की जाएगी, यदि कोई एक मुश्त अदायगी करना चाहता है तो भी ठीक है, अन्यथा पैंशन बनने के बाद 50 प्रतिशत हर महीने पैंशन में से वसूली जाएगी। एस.वाई.एल. पर 20 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाई गई बैठक के बारे में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्री को दिल्ली बुलाया है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला हरियाणा के हक में आया है।

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