9:31 pm - Friday April 28, 2017

SSC में कई बार पूछे गए साइंस के ये 8 सवाल

हमारी रोजमर्रा से जुड़े हैं साइंस के कुछ सवाल, जिनको कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में कई बार पूछा गया है। आगे की स्लाइडों में देखें ऐसे 8 अहम सवाल और उनके जवाब …

रात में पेड़ के नीचे नहीं सोना चाहिए, क्यों? :- पौधे रात में कार्बनडाइऑक्साइड छोड़ते हैं।

पानी में डुबी हुई लकड़ी टेढ़ी दिखाई देती है, क्यों? :- ऐसा प्रकाश के अपवर्तन के कारण होता है।

विद्युत बल्ब में फिलामेन्ट टंगस्टन का क्यों बना होता है? :- इसका गलनांक बहुत उच्च होता है इसलिए टंगस्टन का इस्तेमाल किया जाता है ताकि ज्यादा गर्म होने पर फिलामेंट गल न जाए।

सोडियम को मिट्टी के तेल में डुबा कर क्यों रखा जाता है? :- सोडियम ज्यादा अभिक्रियाशील होता है। अगर इसे खुला रखा जाएगा तो ऑक्सिजन के संर्पक में आकर जलने लगेगा।

बिजली के कारीगर हाथ में रबड़ के दस्ताने पहनते है क्यों? :- इंसान का शरीर विद्युत का सुचालक होता है लेकिन रबड़ विद्युत का कुचालक होती है। रबड़ का दास्ताना पहनने से कारीगर को बिजली का झटका नहीं लगता है।

हीरे रात में क्यों चमकते हैं? :- हीरे का अपवर्तनांक उच्च होता है जिस कारण प्रकाश की किरणें आंतरिक रूप से परावर्तित होती हैं। इसके अलावा हीरे का आकार भी अहम भूमिका निभाता है। हीरे को ऐसे काटा जाता है कि इस पर पड़ने वाली प्रकाश की किरण अंदर में कई बार परावर्तित हों और इस तरह से सभी दिशा में प्रकाश जाता है।

साफ आसमान प्राय: नीला दिखाई पड़ता है, क्यों? :- जब सूर्य से आने वाला प्रकाश पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करता है तो वातवरण के कणों से टकराकर इधर-उधर बिखर जाता है लेकिन वातावरण के कण श्वेत प्रकाश के नीले रंग को परावर्तित कर देते हैं। प्रकाश के रंगों में से नीले रंग में फैलने की क्षमता अधिक होती है। इसलिए आकाश में आने वाले रंगों में नीले रंग की मात्रा अधिक होती है। इसी कारण आकाश का रंग नीला दिखाई देता है।

रेगिस्तान में मरीचिका बनने का क्या कारण है? :- प्रायः गर्मियों के दोपहर में रेगिस्तान की यात्रा करने वाले यात्रियों को कुछ दूरी पर पानी होने का भ्रम हो जाता है। इस भ्रम को रेगिस्तान की मरीचिका या मृगतृष्णा कहते हैं। मरुस्थल की रेतीली भूमि गर्मी के कारण अधिक गर्म हो जाती है जिसके कारण धरती के पास हवा की गर्म परतें विरल हो जाती हैं किन्तु ऊपर की परतें ठंडी होने के कारण वे अपेक्षाकृत सघन होती हैं। ऐसी अवस्था में किसी वस्तु या पेड़ की चोटी से आने वाली प्रकाश की किरणें हवा की विभिन्न परतों से अपवर्तित होकर अभिलंब से दूर हटती जाती हैं परिणामतः एक ऐसी स्थिति आ जाती है जिसमें इन किरणों का पूर्ण आंतरिक परावर्तन हो जाता है। पेड़ की चोटी से आती हुई प्रकाश की किरणों का पूर्ण आंतरिक परावर्तन हो जाने के कारण यात्रियों को पेड़ का उलटा प्रतिबिंब दिखाई देने लगता है जिससे उन्हें भ्रम हो जाता है कि आगे पानी है जिसमें पेड़ की प्रतिबिंब दिखाई दे रही है।

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