2:00 pm - Monday December 5, 2016

What the MTCR membership actually means for India

What the MTCR membership actually means for India
क्या है MTCR?
M – Missile
T – Technology
C- Control
R – Regime
एमटीसीआर का गठन वर्ष 1987 में दुनिया के सात बड़े विकसित देशों ने किया था। 1987 में बने इस ग्रुप में शुरुआत में G-7 देश अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, जापान, इटली, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल थे । बाद में 27 अन्य देश भी इसमें शामिल हुए हैं। वर्ष 2008 में इस समूह के लिए भारत के आवेदन पर इटली ने आपत्ति की थी। लेकिन इटली के नौसैनिकों को छोड़े जाने के बाद इस बार इटली ने कोई आपत्ति नहीं जताई।
  • चीन और पाकिस्तान से पहले भारत बना MTCR का 35वां सदस्य
  • चीन MTCR का मेंबर नहीं है, लेकिन वह इसकी गाइडलाइन मानने पर राजी है।
  • इसका मकसद बैलिस्टिक मिसाइलों को बेचने की लिमिटेशन तय करना है।
  • MTCR मुख्य रूप से 500 kg पेलोड ले जाने वाली और 3000 किमी तक मार करने वाली मिसाइलों और अनमैन्ड एरियल व्हीकल टेक्नोलॉजी (ड्रोन) के खरीदे-बेचे जाने पर कंट्रोल रखता है।
MTCR से भारत को क्या मिलेगा फायदा?
  • एमटीसीआर में एंट्री से भारत को रॉकेट सिस्टम, ड्रोन और इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी हासिल करने में मदद मिलेगी।
  • अमेरिका से जनरल एटॉमिक्स कंपनी द्वारा बनाए गए प्रीडेटर ड्रोन्स और अनमैन्ड एरियल व्हीकल मिलने में मदद मिलेगी।
  • इन्हीं ड्रोन्स ने अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ हमलों में अहम भूमिका निभाई थी। और यही वह ड्रोन्स हैं जिनसे पाकिस्तान में अमेरिका ने आतंकियों पर हमले किए हैं।
  • इन्हें जनरल एटॉमिक्स एमक्यू-1 प्रीडेटर भी कहा जाता है।
  • इसे सबसे पहले यूएस एयरफोर्स और सीआईए ने यूज किया था।
  • नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) की फौजों ने बोस्निया, सर्बिया, इराक वॉर, यमन, लीबियाई सिविल वॉर में भी इनका इस्तेमाल किया था।
  • प्रीडेटर के अपडेटेड वर्जन में हेलफायर मिसाइल के साथ कई अन्य वेपन्स भी लोड होते हैं।
  • प्रीडेटर में कैमरा और सेंसर्स भी लगे होते हैं जो इलाके की पूरी मैंपिंग में खासे मददगार होते हैं।
  • इस ग्रुप में शामिल होने के बाद अब भारत हाईएंड मिसाइल टेक्नीक और सर्विलांस ड्रोन खरीद सकता है।
  • 48 देशों के न्यूक्लियर एनर्जी सप्लायर्स ग्रुप यानी एनएसजी का भारत मेंबर नहीं है। लेकिन चीन है।
  • भारत अब एमटीसीआर का मेंबर बन गया है। लेकिन चीन 2004 से कोशिश करने के बावजूद इस ग्रुप में शामिल नहीं हो सका। इसकी वजह उसका मिसाइल टेक्नोलॉजी अप्रसार में खराब रिकॉर्ड है।
  • सच्चाई ये है कि दोनों देश वही हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, जो उनके पास नहीं है।
  • भारत को दुनिया की बेहतरीन टेक्नोलॉजी हासिल करने के लिए एक्सेस मिल जाएगा।
  • इस ग्रुप में शामिल होने के बाद अब भारत हाईएंड मिसाइल टेक्नीक और सर्विलांस ड्रोन खरीद सकता है।
  • भारत और रूस के ज्वाइंट वेंचर में बन रही सुपसोनिक क्रूज मिसाइल भी भारत अब रूस के साथ मिलकर दूसरे देशों को बेच सकता है।
  • भारत का दावा इसलिए भी मजबूत कहा जा रहा है, क्योंकि उसने कभी भी अपने मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम में MTCR गाइडलाइन से अलग जाकर काम नहीं किया।
  • पिछले कुछ सालों में कई देशों ने भारत के MTCR में आने का सपोर्ट किया है।
पिछले साल इटली ने किया था हमारा विरोध, अब समर्थन में
– यूएस से न्यूक्लियर डील के बाद भारत एनएसजी और एमटीसीआर जैसे ग्रुप में एंट्री की कोशिश कर रहा है।
– एमटीसीआर में एंट्री की कोशश कामयबा हो चुकी है।
– ये ग्रुप न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल और केमिकल वेपन्स को कंट्रोल करने से जुड़े हैं।
– इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया ग्रुप केमिकल वेपन्स और वैसेनार अरेंजमेंट छोटे हथियारों वाला ग्रुप है।
– मरीन्स से जुड़े विवाद के चलते पिछले साल इटली ने भारत की एमटीसीआर में एंट्री का विरोध किया था।
– इटली के दो मरीन पर भारत के दो मछुआरों की हत्या का आरोप था। अब इन दोनों मरीन्स को इटली वापस भेजा जा चुका है।
– इसके बाद इटली भी भारत की इस ग्रुप में एंट्री को लेकर नर्म रुख अपना रहा है।
– इस महीने की शुरुआत में भारत हेग कोड ऑफ कंडक्ट को मानने के लिए तैयार हो गया था।
– ये बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रसार को रोकने से जुड़ा ग्रुप है। कोड ऑफ कंडक्ट मानने के बाद ये तय हो गया था कि एमटीसीआर में भारत को एंट्री मिल जाएगी।
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