7:38 am - Tuesday January 23, 2018

नए डॉक्टरों की जॉइन करने की अवधि खत्म, 553 में से 200 ने ही किया जॉइन

नए डॉक्टरों की जॉइनिंग की अवधि समाप्त हो गई है। राज्यभर में 553 में से मात्र 200 डॉक्टरों ने ही ड्यूटी जॉइन की है। 109 सीटें रिजर्व कैटेगरी की बैकलॉग रह गई हैं। सरकार द्वारा 662 डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया पिछले डेढ़ साल से चल रही है। अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। डॉक्टर सरकारी नौकरियों में रुचि ही नहीं दिखा रहे। सरकार मंगलवार को 239 डॉक्टरों की वेटिंग लिस्ट जारी करेगी। स्वास्थ्य विभाग के एसीएस अमित झा ने इस बारे में चंडीगढ़ में हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जसबीर परमार के साथ मीटिंग कर डॉक्टरों के जॉइन करने के कारण जाने हैं।

डॉ. परमार ने एसीएस को बताया कि नए डॉक्टर सरकार की पॉलिसी के कारण जॉइन नहीं करना चाहते। सरकार ने 662 डॉक्टरों की भर्ती निकाली थी, लेकिन 50 प्रतिशत सीटें भी नहीं भर पाईं। पहले सरकारी डॉक्टरों के लिए पीजी में दाखिले के लिए 30 प्रतिशत कोटा होता था। जिस कारण नए डॉक्टर सरकारी नौकरी में आकर पीजी में दाखिला चाहते थे। लेकिन, सरकार की कमजोर पैरवी के कारण कोर्ट ने सरकारी डॉक्टरों का कोटा रद्द कर दिया। विशेषज्ञों को सरकार ने जल्द अतिरिक्त इंसेंटिव देने का आश्वासन दिया था, मगर अब तक किसी विशेषज्ञ को इंसेंटिव नहीं मिला। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के लिए काम करने का वातावरण भी नहीं ठीक नहीं है। इस कारण यहां नए डॉक्टर काम नहीं करना चाहते। वह सरकारी नौकरी में मिलने वाले वेतन से भी संतुष्ट नहीं हैं।
पानीपत के सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा ने बताया कि सोमवार को नए डॉक्टरों के लिए जॉइन करने की अंतिम तिथि थी। मुख्यालय से आदेश आए थे कि सोमवार को भी डॉक्टर जॉइन करने के लिए आए तो उनका जल्द से जल्द मेडिकल कराकर जॉइनिंग प्रक्रिया पूरी की जाए। इस कारण हमने शाम को साढ़े 6 बजे तक ऑफिस खुला रखा था। एक डॉक्टर की जॉइनिंग भी कराई।

1 – यह एक्ट 100 बेड से कम के अस्पताल पर लागू हो
कारण-छोटेअस्पतालों पर सीमित संसाधन होते हैं, एक्ट लागू होने के बाद कई कागजी कार्यवाही होती हैं, यह हर माह करनी होंगी। इसके लिए हॉस्पिटल को अलग से स्टाफ रखना होगा।
सरकार ने मांग नहीं मानी
2-इस एक्ट के तहत अस्पतालों को मिनिमम सुविधाएं जैसे लैब, अल्ट्रासाउंड आदि देनी होंगी।
कारण-100बेड से कम वाले अस्पताल इस सुविधा को नहीं दे सकते क्योंकि उनके पास मरीज भी कम होते हैं और सस्ते इलाज लेने वाले मरीज आते हैं। अगर वह अपने अस्पताल में इन सुविधाओं को देंगे तो कॉस्ट ऑफ ट्रीटमेंट बढ़ जाएगा जिसका असर मरीजों पर पड़ेगा।
3-एक्ट में एक क्लाॅज है जिसके तहत किसी भी समय मरीज के आने पर अस्पतालों को इमरजेंसी सुविधा देनी होगी, इसके साथ-साथ क्रिटिकल कंडीशन को भी नॉर्मल करना होगा। ऐसा करने पर 5 लाख का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।

कारण-यहसंभव नहीं है, क्योंकि अगर किसी व्यक्ति का एक्सीडेंट आंखों के अस्पताल के पास होता है तो आंखों का चिकित्सक उसे फर्स्ट एड तो दे सकता है मगर उसकी चोटों का उपचार नहीं कर सकता। उपचार सिर्फ उस विषय का स्पेशलिस्ट ही कर सकता है।
सरकार-आईएमए के इस सुझाव पर सरकार राजी हो गई है इसमें बदलाव कर प्राथमिक चिकित्सा के लिए माना गया है।

4-नर्सिंग होम में मिनिमम स्टैंडर्ड पालन करने होंगे।
कारण-इसनियम पर आईएमए ने सुझाव दिया कि कई नर्सिंग होम 20 या 25 वर्ष से संचालित हैं, उनको दोबारा बनाना संभव नहीं है।
सरकार-सुझाव मान लिया
5-एक्ट के अनुसार नर्सिंग होम में 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं देनी होंगी।
कारण-24 घंटे छोटे अस्पतालों को सुविधा देना मुमकिन नहीं है, क्योंकि चिकित्सकों कमी है। अस्पताल इमरजेंसी केस के लिए चिकित्सक रखता भी है तो क्या इसका बोझ लोगों पर नहीं पड़ेगा, इससे तो चिकित्सा और महंगी हो जाएगी।
आईएमएकी मांगें
सरकारबिल में संशोधन करे, असेंबली में हो तो ऑर्डिनेंस के साथ पास किया जाए।

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