3:01 am - Friday June 22, 2018

दक्षिण हरियाणा और जाट बेल्ट में हो रहा शराब ठेकों का विरोध

दूध-दही और अपने खाने के लिए दुनिया भर में मशहूर हरियाणा में शराब का खुलकर विरोध होने लगा है। राज्य सरकार के पास सबसे अधिक दक्षिण हरियाणा और जाट बेल्ट की पंचायतों से आए हैं। हालांकि इन प्रस्तावों को अलग-अलग कारण बताकर खारिज किया जा रहा है।

राज्य सरकार के पास शराब ठेकों के खिलाफ अभी तक कुल 503 आवेदन आए हैं, जिनमें सरकार ने 305 आवेदन खारिज कर दिए। सिर्फ 192 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां इस बार ठेके नहीं खुलेंगे। सबसे अधिक आवेदन जींद से 38 आए हैं, जबकि दूसरा नंबर भिवानी और सोनीपत का है, जहां से 29 और 25 आवेदन आए हैं। दक्षिण हरियाणा के पलवल से 44 और रेवाड़ी से 29 आवेदन आए हैं। करनाल से सबसे कम केवल दो आवेदन ही शराब ठेकों के खिलाफ सरकार के पास पहुंचे हैं।

पिछली बार हुई आगजनी और दो लोगों की मौत से सबक लेते हुए सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों से शराब ठेके नहीं खोलने के प्रस्ताव मांगे थे। इसके साथ ही सरकार को इन ठेकों के बंद होने से राजस्व के नुकसान की चिंता सता रही है। सरकार चाहती है कि नई आबकारी नीति में उसके खजाने में करीब छह हजार करोड़ रुपये आए।

हरियाणा की वर्ष 2018-19 की आबकारी नीति मंगलवार को आने की संभावना थी, मगर इसे करीब एक सप्ताह के लिए टाल दिया गया है। अब 3 मार्च को राज्य मंत्रिमंडल की दोबारा बैठक होगी, जिसमें आबकारी नीति को मंजूरी दी जा सकती है। मंत्रिमंडल में सहमति बनी तो यह पहला मौका होगा, जब राज्य की आबकारी नीति दो साल के लिए आएगी। अभी तक एक साल के लिए ही आबकारी पॉलिसी तैयार होती रही है। पिछले साल की पॉलिसी में पांच हजार करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया था, जो 20 फीसद तक शराब महंगी करने के बाद जुटाया जा सका है।

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