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निगम चुनाव में गैरजाट कार्ड खेलने में सफल रही भाजपा, 2019 के के लिए भी यही रणनीति

हरियाणा के हुए पांच नगर निगमाें के चुनाव में भाजपा ने गैरजाट कार्ड सफलतापूर्वक खेला। पार्टी ने अगले साल हाेने वाले लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में भी यही फार्मूला अपनाने की तैयारी में है। गैरजाट मतदाताओं के साथ हरियाणा के पांच नगर निगमों में मजबूत होकर उभरी भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है।

गैर जाट मतों के सहारे विधानसभा और लोकसभा जीतने की तैयारी

तीन राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद हतोत्साहित भाजपा के लिए पांच नगर निगमों के चुनाव नतीजे संजीवनी बूटी साबित हुए। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में निगम चुनाव में मिली अपार जीत का संदेश पूरे देश तक पहुंचा है। गैर जाट मतों के सहारे जीत हासिल करने वाली भाजपा इसी रणनीति पर अब अगले चुनाव लडऩे की ओर बढ़ रही है।

हरियाणा में जातिगत राजनीति शुरू से हावी रही है। भाजपा ने सत्ता में आने के बाद हालांकि जातिगत राजनीति से तौबा की, लेकिन पांच नगर निगमों के चुनाव में पार्टी को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी, जिसका फायदा जीत के रूप में सामने आया है। राज्य में 2016 में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के बाद जाट और गैर जाट की राजनीति ने पूरी तरह से जोर पकड़ लिया। इस आंदोलन के बाद भाजपा ने कई बार जाट व गैर जाट की राजनीति को खारिज भी किया, लेकिन पांच निगमों के चुनाव में पार्टी ने सिर्फ गैर जाट मेयर पद के उम्मीदवारों पर ही दांव खेला है, जो कारगर साबित हुआ है।

भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ माने जाने वाले रोहतक में भी गैर जाट मनमोहन गोयल को प्रत्याशी के रूप में उतारा। यहां इनेलो के जाट उम्मीदवार संचित नांदल ने हालांकि कड़ा मुकाबला दिया, लेकिन जीत भाजपा के गैर जाट उम्मीदवार की हुई और हुड्डा के पंजाबी उम्मीदवार सीताराम सचदेवा को हार का मुंह देखना पड़ा। सचदेवा की हार को हुड्डा की निजी माना जा रहा है। भाजपा ने यहां पार्षद पद के लिए एक भी जाट उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया था। इसके बावजूद भाजपा के आठ गैर जाट पार्षद चुनाव जीतकर आए हैं।

जीटी रोड बेल्ट पर सीएम सिटी करनाल, पानीपत व यमुनानगर में भाजपा ने गैर जाट उम्मीदवारों पर दांव खेला है। करनाल में सीएम की पसंद महिला उम्मीदवार वैश्य बिरादरी की रेणुबाला गुप्ता रही, जबकि पानीपत में सिख समाज की प्रतिनिधि अवनीत कौर पर भरोसा जताया गया। यमुनानगर में पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहे मदन चौहान को टिकट मिला। हिसार में पंजाबी गौतम सरदाना पर दांव खेला गया।

विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ कराने का दबाव

पूरे जीटी रोड बेल्ट में भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल का गैर जाट कार्ड पूरी तरह से काम आया और इसका असर यह हुआ कि पूरी भाजपा को अब आगे की जीत भी आसान दिखाई दे रही है। सीएम हालांकि दावा कर रहे कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव अपने समय पर होंगे। यानी एक साथ नहीं हो पाएंगे, लेकिन भाजपा का एक बड़ा तबका चाहता है कि इन चुनावों को एक साथ कराया जाए, ताकि पांचों निगमों में बनी भाजपा के हक की हवा को कैश किया जा सके। चुनाव अब जब भी होंगे, लेकिन यह तय माना जा रहा कि भाजपा गैर जाट मतों के सहारे सत्ता में वापस लौटने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी।
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‘हमारा जातिवाद में नहीं कोई भरोसा’

” हमारा जातिवाद में कतई भरोसा नहीं है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल सभी जाति व बिरादरी के लोगों को साथ लेकर चलते हैं। उन्होंने हरियाणा एक हरियाणवी एक का नारा दिया है। कोई उम्मीदवार यदि व्यक्तिगत रूप से किसी भी प्रचार का तरीका अपनाता है तो वह उसका निजी मामला है। भाजपा हर वर्ग की पार्टी है और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में प्रदेश के विकास की चिंता करती है।

राजीव जैन, मीडिया सलाहकार, सीएम हरियाणा।

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