8:39 am - Tuesday May 22, 2018

प्रश्‍नपत्र विवाद: एसएसएससी का मुख्य परीक्षक ब्लैकलिस्ट, आजीवन प्रतिबंध लगा

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की जूनियर इंजीनियर (सिविल) की लिखित परीक्षा में ब्राह्मïणों को लेकर पूछे गए आपत्तिजनक सवाल पर कर्मचारी चयन आयोग ने मुख्य परीक्षक को जिम्मेदार ठहराते हुए उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यह परीक्षक भविष्य में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा के लिए कोई पेपर सेट नहीं कर सकेगा। दूसरी ओर, आयोग के अध्‍यक्ष भारत भूषण भारती ने विवा‍दित प्रश्‍न के लिए माफी मांगी है।

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने मुख्‍य परीक्षक की पहचान उजागर किए बिना उससे ब्राह्मणों से जुड़े सवाल को परीक्षा में डालने का स्रोत (सोर्स) भी पूछा है। आयोग ने प्रतिबंधित मुख्‍य परीक्षक से कहा है कि वह उस किताब, प्रश्नावली अथवा स्रोत के बारे में लिखित रूप से हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को जानकारी दे, जिसके आधार पर जूनियर सिविल इंजीनियर की लिखित परीक्षा में सवाल डाला गया है।

हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की जूनियर इंजीनियर (सिविल)की परीक्षा में 75वें नंबर के सवाल में पूछा गया था कि कौन हरियाणा में अपशकुन नहीं माना जाता है? जवाब में चार विकल्प दिए गए थे, जिसमें पहला खाली घड़ा, दूसरा फ्यूल भरा कास्केट, तीसरा काले ब्राह्मण से मिलना और चौथा ब्राह्मण कन्या को देखना। परीक्षा की उत्तर कुंजी में सही उत्तर ब्राह्मण कन्या को देखना दर्शाया गया है। इसे मुद्दा बनाते हुए अखिल भारतीय ब्राह्मण आरक्षण संघर्ष समिति ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किए और आयोग से पूछा कि क्या काले ब्राह्मण से मिलना अपशकुन है?

हरियाणा के विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ-साथ राज्य सरकार के मंत्रियों तक ने इस सवाल पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी। पूरे राज्य में विवाद बढ़ता देख हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने चीफ एग्जामिनर को दस दिन के भीतर लिखित जवाब देने को कहा है। यह अवधि 16 मई को पूरी होगी।

आयोग के चेयरमैन भारत भूषण भारती ने मुख्‍य परीक्षक से यह भी पूछा है कि उसने किस मानसिकता और सोच के तहत ब्राह्मणों से जुड़े विवादित, जातिगत तथा भावनाएं आहत करने वाले सवाल को प्रश्नपत्र में शामिल किया है। चेयरमैन के अनुसार मुख्‍य परीक्षक की ओर से लिखित जवाब आने के बाद आयोग संबंधित किताब, प्रश्नावली अथवा सोर्स को भी प्रतिबंधित कर सकता है।

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने पेपर सेट करने वाले तमाम मुख्‍य परीक्षकों को एडवाइजरी जारी की है। आयोग के चेयरमैन की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि कोई भी मुख्‍य परीक्षक किसी भी परीक्षा में कोई विवादित अथवा जातिगत सवाल नहीं पूछेगा। भारत भूषण भारती ने स्पष्ट किया कि परीक्षक ने क्या प्रश्नपत्र बनाया है, इसकी कोई प्रूफ रीडिंग नहीं होती। यदि प्रूफ रीडिंग होती तो पेपर आउट होने का खतरा बना रहता है। प्रूफ रीडिंग के अभाव में पेपर सीधे परीक्षा केंद्र में पहुंचते हैैं।

भावनाएं आहत करने वाला सवाल पूछे जाने के लिए माफी मांगता हूं : भारती

 परीक्षा में ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत करने वाला सवाल पूछा गया। इसके लिए कौन दोषी है?

– मुख्य परीक्षक को हमने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उनका जो भी जवाब आएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन मैैं चेयरमैन के नाते और व्यक्तिगत रूप से अपनी जिम्मेदारी मानते हुए समाज के लोगों से माफी मांगता हूं। खेद जताता हूं। ऐसा नहीं होना चाहिए था। आयोग को इस बात का बेहद दुख है।

 किस चीफ एग्जामिनर ने यह पेपर सेट किया था? कहां का रहने वाला है?

– आयोग के पास विषयवार कई चीफ एग्जामिनर होते हैैं। उनकी पहचान गोपनीय रखी जाती है। वह सार्वजनिक नहीं की जा सकती। उनके बनाए पेपर भी नहीं पढ़े जाते, ताकि प्रश्नपत्रों की गोपनीयता भंग न हो। इसी वजह से बिना पढ़े पेपर सीधे परीक्षा केंद्र में गए।

इस बात का क्या गारंटी कि भविष्य में कोई मुख्‍य परीक्षक ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराएगा?

– हमने सभी के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। आयोग अपनी जिम्मेदारी को लेकर संजीदा है। मुख्‍य परीक्षक का लिखित जवाब आने के बाद हम उस सोर्स की तह में भी जाएंगे, जहां से सवाल लिया गया है। जरूरत पडऩे पर उस सोर्स को प्रतिबंधित करेंगे।

सरकार के मंत्री और समूचा विपक्ष जातिवादी सवाल पूछे जाने से नाराज है। आक्रोश लगातार बढ़ रहा?

– माफी से बड़ा कोई समाधान नहीं होता। मैैं व्यक्तिगत और चेयरमैन के नाते माफी मांग चुका हूं। किसी की भावनाएं आहत करने की हमारी कोई मंशा नहीं थी।

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