2:43 pm - Wednesday October 18, 2017

15 घंटे पहले दे दी थी पेपर लीक की सूचना, फिर भी वही पर्चा बंटा

परीक्षा होने से पहले पेपर लीक होने की बात पता न चलना तो कई बार हो चुका है। मगर पेपर लीक होने की सूचना मिलने के बावजूद अगले दिन वही पर्चा स्कूलों बंटने और परीक्षा होने का मामला पहली बार सामने आया है। हरियाणा शिक्षा बोर्ड की शनिवार को होने वाली अंग्रेजी विषय की 11वीं कक्षा की परीक्षा का पर्चा शुक्रवार रात को लीक हुआ था। जिला शिक्षा अधिकारी को 15 घंटे पहले ही इसकी सूचना थी, बावजूद इसके इस मामले में न तो कोई एक्शन लिया गया और न ही किसी तरह जांच बैठाई गई। इस पेपर को लीक होने की बात शुक्रवार रात को ही भास्कर ने उजागर कर दी थी।

शुक्रवार को 16 पेजों के 401 नंबर कोड की जो कॉपी एक-एक हजार रुपए में बेची गई थी। शनिवार को मिलान करने पर पाया कि बच्चों को जो पेपर दिया गया था, वो भी 16 ही पेज का है और इसका कोड भी 401 ही है। इतना ही नहीं भास्कर ने जो प्रश्न शुक्रवार को खबर में प्रकाशित किए थे वो भी वही हैं और पूरा का पूरा पेपर लीक हुए प्रश्नपत्र से मेल खाता है। मगर हैरत की बात ये है कि जब प्रश्न पत्र लीक हुआ तो इस बारे में शिक्षा विभाग के किसी अधिकारी को कानों कान खबर भी नहीं मिली। डीईओ बलजीत सिंह सेहरावत का फोन नॉट रीचेबल आने के कारण पेपर वाट्स एप पर पेपर सेंड कर दिया गया था। तो इसके बाद भी पेपर मिलान क्यों नहीं किया गया और अगर किया गया तो पेपर क्यों लिया गया।

परीक्षा के दिन ही सेंटर में देने थे पेपर, तो कहां से आया प्रश्नपत्र :- बातचीत में सामने आया है कि इस बार नकल पर नकेल कसने के लिए नए नियम बनाए गए हैं। जिसके तहत प्रश्नपत्र को परीक्षा के महज कुछ समय पहले ही सेंटर में दिए जाना था। सभी परीक्षा केंद्र नियंत्रकों को इसके लिए दिशानिर्देश भी दिए गए थे। पहले पेपर के अलावा बाकी पेपरों में इस निर्देश को लागू किए जाने की बात भी कही जा रही थी। मगर सवाल ये है कि पहले पेपर में परीक्षा के एक दिन पहले ही प्रश्न पत्र को क्यों दे दिया गया। वहीं अगर पेपर लीक हुआ तो कैसे हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

अभी ये हाल, तो बोर्ड की परीक्षा में क्या होगा :- बता दें कि ग्यारहवी कक्षा में पेपर बोर्ड में ही बनाए जाते हैं, वहीं पेपर चेक स्कूल में ही किए जाते हैं। लेकिन अभी से अगर ये हाल है तो 7 मार्च से शुरु होने वाली बोर्ड की परीक्षा में शुरु की गई नकल रहित परीक्षा की योजना कैसे सफल हो पाएगी। यह बड़ा सवाल है। क्योंकि पेपर तो इसी प्रक्रिया से बोर्ड की परीक्षा में पहुंचते हैं। पेपर के पैकेट पर लगी सील को परीक्षा शुरू होने के कुछ देर पहले भले ही खोले जाने की बात कही जाती हो। मगर पेपर परीक्षा के एक दिन पहले ही बच्चों के हाथ लग जाते हैं।

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