8:36 pm - Monday December 11, 2017

भर्तियों को चुनौती देने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला, जानिए मामला

भर्ती प्रकिया को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा ही अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट का कहना है कि किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया को भर्ती शुरू होने या उससे पहले ही चुनौती दी जा सकती है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद दावे पर विचार नहीं किया जा सकता है।

इस आदेश के साथ हाईकोर्ट ने असिस्टेंट एक्साइज एंड टैक्सेशन ऑफिसर के 29 पदों की भर्ती में दिव्यांग श्रेणी में दावा करने वाली रोहतक निवासी याची का दावा खारिज कर दिया। मामले में याचिका दाखिल करते हुए रोहतक निवासी याची ने कहा था कि हरियाणा सरकार की ओर से असिस्टेंट एक्साइज एंड टैक्सेशन ऑफिसर के 29 पदों के लिए मांगे गए आवेदन की अंतिम तिथि 24 दिसंबर 1992 थी।

इस विज्ञापन को जारी करते हुए सरकार ने 24 जनवरी 1991 की पॉलिसी को ध्यान में नहीं रखा, जिसमें दिव्यांग श्रेणी के तहत आरक्षण दिया जाना था। याची ने कहा कि 29 सीटों के अनुपात में यदि देखा जाए तो उसकी श्रेणी का एक पद बनता है। यह पद एरियर, सीनियॉरिटी और अन्य लाभ के साथ दिया जाए। इसके लिए याची ने हरियाणा सरकार को 25 अप्रैल 1996, 13 अगस्त 1997 और 24 अक्तूबर 1997 को रिप्रेजेंटेशन भी सौंपी थी।

हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याची ने इस भर्ती प्रक्रिया को चुनौती 1998 में दी थी, जबकि मार्च 1996 में फाइनल रिजल्ट घोषित किया जा चुका था। याची के दावे पर तब विचार किया जा सकता था, जब उसने नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान या इससे पहले आवेदन किया होता। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद किए गए दावे को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

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