9:32 pm - Friday April 28, 2017

जाटों को आरक्षण देना संविधान के प्रावधानों के खिलाफ कैसे है: हाईकोर्ट

हरियाणा में जाटों को आरक्षण का लाभ दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याची से बड़ा सवाल पूछ डाला। हाइकोर्ट ने सवाल किया कि यह आरक्षण संविधान के खिलाफ कैसे है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के इस सवाल पर बुधवार को याची अपना पक्ष रखेगा।

मंगलवार को याचिकाकर्ता कुम्हार महासभा की ओर से सीनियर एडवोकेट वीके जिंदल ने दलीलें आरंभ करते हुए कहा कि जहां पर भी संविधान के किसी प्रावधान का उल्लंघन कोई एक्ट करता हो, वहां उस एक्ट को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है और कोर्ट उसे खारिज कर सकता है।

इसके साथ ही जाटों को दिए गए आरक्षण को गलत करार देते हुए जिंदल ने कहा कि संविधान और सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न जजमेंट में यह साफ है कि यदि कोई वर्ग सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़ा हुआ होगा तो आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है।

जाटों सहित 6 जातियों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा दिखाने के लिए हरियाणा सरकार ने कोई आंकड़े ही एकत्रित नहीं किए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए दलील दी गई

सुनवाई के दौरान कर्नाटक में आरक्षण को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए दलील दी गई। कहा गया कि इस मामले में दिए गए आरक्षण को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बिना आंकड़े एकत्रित किए कैसे आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है।

याची ने कहा कि प्रावधानों के तहत राज्य की राय में यदि किसी वर्ग को आरक्षण की जरूरत हो तो उसे राज्य आरक्षण दे सकता है, लेकिन आरक्षण देने के लिए राय का निर्माण करने के लिए ठोस आधार व आंकडे़ अनिवार्य हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि याची की इन दलीलों से सहमत हों भी तो याची यह बताए कि आखिर हरियाणा सरकार ने आरक्षण का प्रावधान कर संविधान के कौन से प्रावधान के खिलाफ कार्य किया है।

याची पक्ष मंगलवार को दलीलें पूरी नहीं कर सका, जिसके चलते सुनवाई को बुधवार के लिए टाल दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि तीन दिन के भीतर इस मामले में सभी पक्ष अपनी दलीलें पूरी कर लेें ताकि इस मामले पर जल्द फैसला सुनाया जा सके।

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