8:33 pm - Monday December 11, 2017

पुलिस कर्मियों का प्रतिदिन राशन भत्ता 20 रुपए, कैदी पर खर्च किए जाते हैं 75 रुपए

आमजन की सुरक्षा करने वाले पुलिसकर्मियों को सरकार से मिलने वाला राशन भत्ता जेल में बंद कैदियों से भी कम है। कैदी के डाइट चार्ट की बात करें तो अलग अलग कैटेगरी के कैदी पर 36 रुपये से लेकर 75 रुपये प्रतिदिन खर्च किए जाते हैं। जबकि एक पुलिस कर्मचारी को 600 रुपये महीने का राशन भत्ता दिया जाता है यानि प्रतिदिन 20 रुपये। अब 20 रुपये मेंं पुलिस कर्मचारी का एक समय का भी भोजन नहीं आता है। इस महंगाई के दौर में पुलिस कर्मचारी एक समय के भोजन पर करीब 40-50 रुपये खर्च करते हैं। यानि सुबह और शाम की बात करें तो प्रतिदिन के 100 रुपये, लेकिन पुलिस कर्मचारी इस परेशानी की तरफ सरकार देख ही नहीं रही है। यही नहीं कई बार पुलिस कर्मियों को 24 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। इसके बावजूद उनके राशन भत्ते में कोई इजाफा नहीं किया जाता है। पुलिस कर्मचारियों को किसी आरोपी को पकडऩे के लिए बाहरी क्षेत्र में भी जाना हो, हाईकोर्ट में जाना हो तो यह सब खर्चा भी अपनी जेब से देना पड़ता है। सरकार ने हफ्ते में एक दिन की छुट्टी के आदेश भी दे रखे हैं। लेकिन कर्मचारियों के अभाव के चलते उन्हें यह छुट्‌टी नहीं मिल पा रही है। वही पुलिस अधिकारी भी किसी किसी कारण के चलते पुलिस कर्मचारियों को छुट्टी देने में असमर्थ होते हैं।
राशन भत्ते के हिसाब से प्रतिदिन के हिसाब से 20 रुपये दिए जाते हैं, लेकिन 20 रुपये अब कुछ आता नहीं है। पुलिस का हर दिन 100 रुपये जो खर्च होता है। उसका साथ की साथ बना लिया जाता है। इसके बाद उस हिसाब को बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दिया जाता है। इसके बाद पुलिस कर्मचारियों की डाइट राशन का हिसाब जोड़ा जाता है तो किसी का 2000 रुपये तो किसी का इससे ज्यादा। यानि मिलने वाले राशन भत्ते से चार गुणा अधिक। फिर से खर्चे को पुलिस कर्मचारियों के वेतन में से काट लिया जाता हैं। 600 रुपये राशन भत्ता पुलिस को एक या दो साल से नहीं बल्कि कई सालों से मिल रहा है, लेकिन कभी भी सरकार ने पुलिस कर्मचारियों की इस परेशानी की तरफ ध्यान नहीं दिया। सरकार को पता होने के बाद भी इसे अनदेखा कर दिया जाता है।
हवालता के लिए डीसी खाते से 11 रुपये
जब थाने में किसी आरोपी को पकड़कर हवालात में डाला जाता है तो उसे आरोपी का खाने -पीने का खर्च पुलिस ही अपनी जेब से खर्च करती है क्योंकि आरोपी जो राशि मिलती है उसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाएगा क्योंकि आरोपी पर खाने के खर्चे के रूप में सिर्फ 11 रुपये दिए जाते हैं जो उपायुक्त के कोष से लेने होते हैं लेकिन पकड़े गए आरोपी पर एक टाइम का खाने का खर्चा 50 रुपये तक बैठ जाता है। इतनी कम राशि को लेने के लिए पुलिस कर्मचारियों को भी शर्म महसूस हो रही है इसलिए तो पुलिस ने उपायुक्त के पास आरोपी पर खर्च होने वाली राशि लेनी ही छोड़ दी है। हर दिन थाने में 4-5 आरोपी किसी किसी मामले में पकड़े जाते है यानि प्रतिदिन एक टाइम का उनका खर्च 250 रुपये बैठता है यानि महीने का आरोपियों पर खर्चा 7 हजार से ज्यादा। जो हर कर्मचारी को अपने जेब से भरने पड़ते हैं।

यह खबर आप हिन्दी रोजगार समाचारपत्र दैनिक एक्स्प्रेस वेबसाइट के द्वारा पढ़ रहे है।

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