2:40 pm - Wednesday October 18, 2017

लिम्का बुक ऑफ रिकाॅर्ड में 6 बार नाम दर्ज, साइंस एक्सप्रेस देखने दूसरे दिन पहुंची दोगुना भीड़

साइंस एग्जिबिशन ऑन व्हील्स के नाम से फेम साइंस एक्सप्रेस को देखने के लिए शहर के लोगों में खासा क्रेज दिखा। लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में 6 बार एंट्री करवा चुकी ट्रेन को देखने वाले लोगों ने एक तरह का रिकार्ड बना डाला। प्रदर्शनी के दूसरे दिन लाेगों की भीड़ उमड़ पड़ी। मंगलवार को स्टेशन पर मेले जैसे माहौल था।10 हजार से भी ज्यादा लोग पहुंचे…

ट्रेन को देखने हर आयुवर्ग के 10 हजार से भी ज्यादा लोग पहुंचे। बच्चे से लेकर बुजुर्ग लोगों ने विज्ञान की जानकारी से सुसज्जित ट्रेन में मॉडल्स की बारीकी से जानकारी ली। 23 फरवरी तक हिसार में रुकने वाली ट्रेन को लेकर लोगाें में उत्सुकता दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इतनी ज्यादा भीड़ स्टेशन पर पहुंचने के कारण व्यवस्था करने वाले लोगों के भी पसीने छूट गए। वहीं शाम पांच बजने के बाद जैसे ही ट्रेन को बंद कर दिया। इसके बाद लाइन में लगे सैकड़ों लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। अब बुधवार और गुरुवार को ट्रेन को सुबह 10 से शाम पांच बजे तक प्रदर्शनी देखने का मौका है।

ग्रीन हाउस गैस को कम करने में भारत सबसे अागे...विश्व में अलग-अलग क्षेत्रों में भारत भले ही कुछ चीजों में पीछे हैं, मगर पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में देश कुछ मुख्य देशों में सबसे आगे हैं। विश्व में वो देश जो अपने खासियत के लिए जाने जाते हैं उन सब में भारत देश ग्रीन हाउस गैस को कम करने में नंबर वन पर है। एक्सपर्ट ने बताया कि प्रति व्यक्ति कार्बन डाइऑक्साइड गैस पैदा करने में यूएसए 16.94 टन, यूके 7.06 टन, फ्रांस 5.04, जर्मनी 9.14 टन, जापान 9.28 टन, रसिया 11.65 टन और भारत महज 1.56 टन उत्सर्जन कर रहा है। ऐसे में हम पर्यावरण को बचाने में सबसे आगे हैं। वहीं कार्बनडाईऑक्साइड के अलावा नाइट्रो ऑक्साइड, मीथेन ग्रीन हाउस गैस को पैदा करने में भी हम आगे हैं। और यह आंकड़ा महज 2.8 प्रतिशत ही है।

दांतों में ही नहीं, समुद्र के कोरल में भी केविटी…एक्सपर्ट ने बताया कि मनुष्य के दांत में ही केविटी नहीं हो रही बल्कि यह समुद्र के कोरल में भी हो रही है। एसिड युक्त बरसात होने के कारण समुद्र में रहने वाले जीवों का जीवन खतरे में है। इसके कारण कोरल यानि वो जगह जिनमें समुद्री जीव छिपकर रहते हैं उनमें केविटी हो रही है। इसके कारण बहुत से प्रजातियां विलुप्त हो जाती हैं। अगर संतुलन न बना रहा तो बेहद घातक परिणाम होंगे। सबसे बड़ी विडंबना ये है कि वाहनाें के कारण बेवजह प्रदूषण हो रहा है। लोग साइकिल नहीं चलाते तो वहीं एक ही घर में तीन तीन लोगों के पास गाड़ी है।

आम आदमी भी होता है वैज्ञानिक…एक्सपर्ट ने बताया कि केवल साइंस की पढ़ाई करने वाले लोग ही वैज्ञानिक नहीं होते बल्कि आम लोग भी हो सकते हैं। ट्रेन में लगे हुए चित्र को दिखाते हुए उन्होंने बताया कि असम की दिव्यांग अर्चना जब दिव्यांग लोगों के हाथों में मुड़ने तुड़ने वाली बैसाखी न होने की वजह से परेशानी को देखा तो उन्होंने ऐसे बैसाखी बना दी, जिसमें स्प्रिंग लगे होने के कारण हाथों पर दबाव कम पड़े इसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। वहीं एक अन्य व्यक्ति ने ऐसा चूल्हा बना दिया जिसमें कुछ ईंधन डालने पर ही वह दिन भर चलता रहता है।

फिर न जाने कब मिलेगा ऐसा मौका : डीपीसी डीपीसी देवेंद्र सिंह ने बताया कि प्लेटफार्म नंबर छह पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तत्वावधान में साइंस एक्सप्रेस ट्रेन में 16 कोच में मौजूद एक्सपर्ट जलवायु में परिवर्तन, परिवर्तन के प्रभाव, पृथ्वी का संतुलन, देश में जलवायु परिवर्तन काे संभालने के लिए प्रयास, समझौता वार्ता, जैव प्रौद्योगिकी द्वारा जैव संसाधन और प्रकृति संरक्षण नई इनोवेशन, किड्स जोन, जॉय ऑफ साइंस लैब आदि विषयों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। साइंस एक्सप्रेस 2007 से देशभर में भ्रमण कर रही है। ऐसे में इस ट्रेन को देखने का मौका फिर न जाने कब मिल सकेगा।

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