12:12 am - Tuesday July 25, 2017

जाटों को आरक्षण मामले की सुनवाई के दौरान हुआ अनूठा वाकया, देखिए

हाईकोर्ट में जाटों सहित 6 जातियों को आरक्षण के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अनूठा वाकया सामने आया। हाईकोर्ट ने याची कुम्हार महासभा से जब यह सवाल किया कि क्यों न पूरा बैकवर्ड क्लास रिजर्वेशन समाप्त कर दें, इस पर याचिकाकर्ताओं सहित सभी पक्षों ने तो सहमति दी, हालांकि हरियाणा सरकार ने इससे किनारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट के हवाले से आरक्षण को जरूरी ठहराया।

इसके बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई वीरवार को भी जारी रखने का निर्णय लिया। मामले की सुनवाई आरंभ होते ही याची पक्ष की ओर से एडवोकेट वीके जिंदल ने दलीलें आरंभ की। जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट के तमाम फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक फैसले में राज्य को पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने का अधिकार होने की बात कही गई है, लेकिन इसके लिए आधार अनिवार्य बताया गया है।

हाईकोर्ट ने इस पर टिप्पणी की कि याची कुम्हार महासभा है, जो खुद आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि क्यों न आरक्षण को समाप्त कर दिया जाए, जिससे याची का आरक्षण भी समाप्त हो जाएगा और सभी काम मेरिट पर होंगे। याची ने कहा कि उसे इस पर कोई आपत्ति नहीं है, साथ ही यादव महासभा सहित जाटों के लिए आरक्षण को चुनौती देने वाले सभी याचिकाकर्ताओं ने इस पर हामी भर दी।

सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि जाटों के लिए आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान नो रिजर्वेशन पर जाट भी याचिकाकर्ता और कोर्ट के साथ नजर आए।

पिछड़ा वर्ग आरक्षण समाप्त होने को उनका समर्थन

जाटों ने हाईकोर्ट में कहा कि यदि आरक्षण समाप्त होता है तो जाट वर्ग का इसे पूरा समर्थन है। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से उनका पक्ष पूछा। हरियाणा सरकार ने कहा कि वे मामले में आरक्षण समाप्त करने के पक्ष में नहीं है।

आरक्षण की आवश्यकता पर सुप्रीम कोर्ट की कई जजमेंट मौजूद हैं और यह फैसला खड़े पैर नहीं किया जा सकता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि एक अन्य याचिका, जिसमें संपूर्ण पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को चुनौती दी गई है, उसके साथ इस पर बहस हो सकती है। इसके बाद जाट आरक्षण पर दोबारा बहस आरंभ हुई।

कोर्ट ने की टिप्पणी :- आरक्षण की यह स्थिति रेल के सामान्य श्रेणी के डब्बे की तरह है, जिसमें अंदर घुस जाने वाले अंदर से दरवाजा बंद करना चाहते हैं, ताकि कोई और अंदर न आ सके।

यह जरूरी कि तीनों स्तंभ एक-दूसरे का सम्मान करें

जाट आरक्षण पर बहस के दौरान याची पक्ष की ओर से एडवोकेट वीके जिंदल ने कहा कि आरक्षण के लिए जो कानून बनाया गया है, वह संविधान के साथ धोखाधड़ी है। इस पर हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि न्यायपालिका विधायिका से ऊपर नहीं है।

संविधान के तीन स्तंभ एक -दूसरे के समानांतर काम करते हैं। विधायिका द्वारा बनाया गया कानून यदि संविधान के अनुसार नहीं है तो इसे खारिज करते हुए यह कह सकते हैं कि अधिकारों का इस्तेमाल सही तरीके से नहीं हुआ, लेकिन इसे संविधान के साथ धोखाधड़ी नहीं करार दिया जा सकता। ऐसे में तीनों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए।

टीवी डिबेट पर होता है स्टेट बॉडी का अपमान

याची पक्ष की ओर से संविधान के साथ धोखाधड़ी की बात पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। कहा कि ऐसी बातें टीवी डिबेट के दौरान ही ज्यादातर सामने आती है। कोर्ट ने चुनावों व अन्य मुद्दों को लेकर टीवी पर होने वाली बहस के दौरान अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल पर दुख जताया।

कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस प्रकार स्टेट व सेंटर के भाग के रूप में काम करने वाले नेताओं पर टिप्पणियां की जाती हैं, जो सम्मानजनक नहींहोती हैं। कोर्ट ने कहा कि न तो विधान के मंदिर में और न ही न्याय के मंदिर में ऐसी हरकतों को बर्दाश्त किया जाएगा।

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